
Rift On Waqf Amendement Bill: वक्फ संशोधन बिल को केंद्र सरकार कुछ देर बाद ही लोकसभा में पेश करने वाली है। जिसको लेकर विपक्षी दल हंगामा कर रहे हैं। इसी बीच मुस्लिम संगठनों में मतभेद खुलकर सामने आ गया है। कुछ मुस्लिम संगठनों ने बिल का समर्थन किया है। वहीं, कुछ मुस्लिम संगठनों ने विरोध किया है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और कई अन्य बड़े संगठनों ने वक्फ बिल का विरोध किया है और इसे मजहबी आजादी पर हमला बताया है। इसके अलावा विपक्षी दलों में कांग्रेस, सपा, AIMIM, राजद और डीएमके ने भी बिल का विरोध किया है।
ये सभी मुस्लिम संगठनों ने किया समर्थन?
जमीयत हिमायत उल इस्लाम ने इस बिल का समर्थन करते हुए वक्फ बोर्ड और वक्फ संशोधन बिल की पैरवी करने वालों से तीखे सवाल पूछे है। जमीयत हिमायत उल इस्लाम के सदर कारी अबरार जमाल ने कहा है कि वक्फ बिल पास होने से सिर्फ मुसलमान परेशान हैं, जो खुद वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर कब्जा किए बैठे हैं। वही, राजस्थान के इंडिया सूफी सज्जादानशील काउंसील वक्फ बिल का समर्थन किया है। यह संगठन अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़ा है।
पसमांदा मु्स्लिम ने किया समर्थन
पसमांदा मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करने वाला यह संगठन वक्फ बिल का समर्थन किया है। सितंबर 2024में जेपीसी की बैठक में इसने बिल को 85फीसदी मुस्लिमों के लिए फायदेमंद बताया था। इस संगठन का कहना है कि बिल वक्फ बोर्ड में सुधार लाकर हाशिए पर अड़ मुस्लिमों को लाभ पहुंचाएगा। पसमांदा समाज का कहना है कि इस संशोधन से वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वाले अशराफ मुसलमानों की नींव हिलने लगी है। इसलिए वह इसका विरोध कर रहे हैं। वहीं, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से संबंध यह संगठन वक्फ बिल के समर्थन में खड़ा है। संगठन ने वक्फ बिल को मुस्सिम समुदाय के लिए फायदेमंद बताया है।
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