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Uttarakhand News: Uttarakhand Election 2027: धामी के नेतृत्व में फिर खिलेगा कमल! तीसरी बार CM बनने की ओर बढ़ते कदम

Uttarakhand News: Uttarakhand Election 2027: धामी के नेतृत्व में फिर खिलेगा कमल! तीसरी बार CM बनने की ओर बढ़ते कदम

Uttrakhand News:उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। पार्टी के सामने न केवल अपनी सरकार दोबारा बनाने, बल्कि राज्य की राजनीति में लगातार तीसरी जीत का इतिहास रचने की चुनौती भी है। वहीं, धामी के लिए यह चुनाव अपने नेतृत्व को साबित करने और तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में लंबे समय तक हर विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही। हालांकि, 2017 और 2022 में लगातार दो बार भाजपा की जीत ने इस राजनीतिक सिलसिले को तोड़ दिया। अब 2027 के चुनाव में पार्टी की नजर जीत की हैट्रिक पर है। ऐसे में धामी सरकार के फैसले, विकास कार्य, रोजगार, पलायन और स्थानीय मुद्दे चुनावी राजनीति के केंद्र में रह सकते हैं।

UCC, नकल विरोधी कानून और भू-कानून से बनाई पहचान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल में कई बड़े नीतिगत फैसलों को प्राथमिकता दी है। समान नागरिक संहिता (UCC), भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त कानून और भूमि संबंधी नियमों में बदलाव उनकी सरकार के प्रमुख निर्णयों में शामिल हैं।

उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 को समान नागरिक संहिता लागू की गई। इसके साथ उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में UCC लागू करने वाला पहला राज्य बना। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य संबंधित नागरिक मामलों से जुड़े इस कानून को भाजपा अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल कर सकती है।

वहीं, भर्ती परीक्षाओं में नकल और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए बनाए गए सख्त कानून को युवाओं के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर देखा जा रहा है। भूमि कानून में बदलाव भी राज्य की जमीन और स्थानीय हितों से जुड़े राजनीतिक विमर्श का अहम हिस्सा है। हालांकि, आगामी चुनाव में इन फैसलों की घोषणा के साथ उनके क्रियान्वयन और आम लोगों पर पड़े प्रभाव का आकलन भी महत्वपूर्ण रहेगा।

युवाओं को रोजगार देना होगी बड़ी चुनौती

उत्तराखंड में बेरोजगारी और युवाओं का दूसरे राज्यों की ओर पलायन लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। धामी सरकार ने सरकारी भर्तियों में तेजी लाने और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। राज्य सरकार के अनुसार, पिछले चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं।

इसके बावजूद रोजगार का मुद्दा केवल सरकारी नियुक्तियों तक सीमित नहीं है। निजी क्षेत्र में अवसर पैदा करना, उद्योगों को बढ़ावा देना, पर्यटन आधारित रोजगार बढ़ाना और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना भी सरकार के लिए अहम होगा।

2027 के चुनाव में भाजपा सरकारी नौकरियों, भर्ती प्रक्रिया में सुधार और निवेश के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के प्रयासों को प्रमुखता दे सकती है। वहीं, विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार के दावों और जमीनी स्थिति को लेकर सवाल उठा सकता है।

निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर

धामी सरकार ने उत्तराखंड में निवेश आकर्षित करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया है। सड़क, रेल, राष्ट्रीय राजमार्ग, पर्यटन सुविधाएं और औद्योगिक विकास राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और दिल्ली-देहरादून संपर्क परियोजना जैसी योजनाएं राज्य में आवागमन को बेहतर बनाने के साथ पर्यटन और व्यापार की संभावनाओं से भी जुड़ी हैं।

मैदानी क्षेत्रों में उद्योग और कारोबार के विस्तार के साथ पर्वतीय जिलों में पर्यटन, होमस्टे, स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देना जरूरी होगा। इन योजनाओं से स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के अवसर कितने मिलते हैं, यह सरकार की विकास संबंधी उपलब्धियों के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पलायन और पहाड़ की अर्थव्यवस्था पर रहेगी नजर

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकना सरकार के सामने बड़ी चुनौतियों में शामिल है। रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और बेहतर संपर्क सुविधाओं की कमी के कारण कई गांवों से लोगों का शहरों की ओर जाना राज्य की लंबे समय से चली आ रही समस्या है।

अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चंपावत जैसे जिलों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाएं लागू करना महत्वपूर्ण होगा। फल-सब्जी उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक पर्यटन और होमस्टे के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

यदि इन क्षेत्रों में रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होता है, तो इसका लाभ स्थानीय परिवारों को मिल सकता है। 2027 के चुनाव में पहाड़ के गांवों की स्थिति और पलायन रोकने के प्रयास भी अहम मुद्दे बन सकते हैं।

महिला सशक्तीकरण भी चुनावी एजेंडे का हिस्सा

धामी सरकार ने सरकारी नौकरियों में उत्तराखंड की महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है। इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय उत्पादों और स्वरोजगार से जुड़ी पहल महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा हैं।

हालांकि, महिला सशक्तीकरण का प्रभाव रोजगार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के स्तर पर भी दिखाई देना जरूरी है। ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

भाजपा आगामी चुनाव में महिला कल्याण और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश कर सकती है।

कानून-व्यवस्था और सुशासन की भी होगी परीक्षा

किसी भी सरकार के लिए कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होता है। धामी सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, सख्त कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्था को अपने प्रमुख एजेंडे में शामिल किया है।

निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षित माहौल जरूरी है। साथ ही, आम नागरिकों की शिकायतों का समय पर समाधान और सरकारी सेवाओं की उपलब्धता भी शासन के प्रति भरोसा मजबूत करती है।

चुनाव के दौरान भाजपा अपने कार्यकाल की प्रशासनिक उपलब्धियों को सामने रख सकती है। दूसरी ओर, सरकार के कामकाज का आकलन स्थानीय समस्याओं, जनसंतुष्टि और योजनाओं के वास्तविक परिणामों के आधार पर भी होगा।

2027 में धामी होंगे भाजपा का प्रमुख चेहरा?

उत्तराखंड विधानसभा की सभी 70 सीटों पर होने वाला चुनाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा होगा। वर्ष 2022 में भाजपा ने 47 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। अब पार्टी के सामने अपने प्रदर्शन को दोहराने और तीसरी बार सत्ता हासिल करने की चुनौती है।

पुष्कर सिंह धामी का नेतृत्व इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनकी सरकार के नीतिगत फैसले, संगठन के साथ तालमेल और विकास संबंधी एजेंडा पार्टी की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि, चुनाव में मुख्यमंत्री के चेहरे और नेतृत्व को लेकर अंतिम तस्वीर भाजपा के आधिकारिक फैसलों से ही स्पष्ट होगी।

राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय समीकरण, उम्मीदवारों का चयन, जनता के मुद्दे और विपक्ष की रणनीति भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करेंगे।

खटीमा में हार के बाद चंपावत उपचुनाव से विधानसभा पहुंचे थे धामी

पुष्कर सिंह धामी के राजनीतिक सफर में वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव एक अहम मोड़ रहा। मुख्यमंत्री रहते हुए वह खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने उन पर भरोसा कायम रखा। इसके बाद उन्होंने चंपावत उपचुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया और मुख्यमंत्री पद पर बने रहे।

अब 2027 का चुनाव उनके राजनीतिक नेतृत्व की एक और बड़ी परीक्षा होगा। भाजपा की जीत की स्थिति में विधायक दल का फैसला यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है। यदि पार्टी जीतती है और धामी को फिर नेता चुना जाता है, तो उनके तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता खुल सकता है।

विकास, रोजगार और नेतृत्व पर टिका होगा चुनाव

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 में भाजपा की नजर लगातार तीसरी जीत पर है। पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पार्टी UCC, नकल विरोधी कानून, भर्ती प्रक्रिया में सुधार, महिला सशक्तीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे मुद्दों को चुनावी अभियान में प्रमुखता दे सकती है।

लेकिन जीत की हैट्रिक का रास्ता केवल सरकार की उपलब्धियां गिनाने से तय नहीं होगा। रोजगार, पलायन, महंगाई, ग्रामीण सुविधाएं और स्थानीय अपेक्षाएं भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकती हैं।

ऐसे में 2027 का चुनाव भाजपा के लिए सत्ता में वापसी से आगे बढ़कर उत्तराखंड में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का अवसर होगा। वहीं, पुष्कर सिंह धामी के लिए यह चुनाव उनके नेतृत्व और तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
 

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