महाकुंभ में स्नान करने वालों की सेहत पर पड़ेगा बुरा असर? सीपीसीबी की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

महाकुंभ में स्नान करने वालों की सेहत पर पड़ेगा बुरा असर? सीपीसीबी की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Mahakumbh 2025: 13जनवरी से शुरु हुए महाकुंभ में स्नान अभी भी जारी है। इसका समापन 26फरवरी को होगा। एक-तरफ जहां संगम में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही हैं। वहीं, दूसरी तरफ गंगा और यमुना के पानी की गुणवत्ता और शुद्धता को लेकर एनजीटी में दायर सीपीसीबी की रिपोर्ट में सवाल उठाए गए। इस रिपोर्ट में जल गुणवत्ता के आंकड़ों का खुलासा किया गया हैं।

एनजीटी में दायर सीपीसीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रयागराज में गंगा और यमुना के पानी की गुणवत्ता बहुत खराब है। जिसका असर लोगों की स्वास्थ्य पर हो सकता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जल गुणवत्ता के मानकों का सही से पालन नहीं किया गया है।

गंगा-यमुना के पानी की गुणवत्ता में गिरावट

सीपीसीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि गंगा और यमुना के पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर सामान्य नहाने वाले पानी से ज्यादा पाया गया हैं। इसके अलावा फेकल कोलीफॉर्म (एफसी) का स्तर भी ज्यादा पाया गया हैं। जिसकी वजह से भक्तों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। बता दें, फ़ेकल कोलीफ़ॉर्म (एफसी) मल-मूत्र में पाए जाने वाले बैक्टीरिया होते हैं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहे है। इसके अलावा जियोसिंथेटिक डीवाटरिंग ट्यूब (जियो-ट्यूब) फिल्ट्रेशन सिस्टम मानकों को पूरा नहीं कर पाया। बता दें, जनवरी में प्रयागराज में सात जियो-ट्यूब स्थलों की जांच की गई थी। जिसका रिजल्ट तय किए गए मानदंडों से अलग पाया गया। इसी के साथ रिपोर्ट में सदर बाजार ड्रेन, राजापुर ड्रेन, ज्वाला देवी ड्रेन, झोंढवाल ड्रेन, शिवकुटी ड्रेन, सलोरी ड्रेन और ससुर खदेरी ड्रेन सहित प्रमुख नालों के इनलेट और आउटलेट बिंदुओं पर फ्लो मीटर के उपस्थित नहीं होने की बात कही गई है। 

19फरवरी को होगी सुनवाई

सीपीसीबी रिपोर्ट में पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए की गई तैयारियों की बात कही गई है। इसी के साथ प्रदूषण को नियंत्रण करने के प्रयासों की खामियों को भी बताया गया है। जिसके बाद अब एनजीटी में इस मामले की सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

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