बाप रे! 1 अरब 13 लाख 55 हजार करोड़ रुपये, रातोंरात युवक हुआ मालामाल; जानें क्या है पूरा मामला?

बाप रे! 1 अरब 13 लाख 55 हजार करोड़ रुपये, रातोंरात युवक हुआ मालामाल; जानें क्या है पूरा मामला?

UP News: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के ऊंची दनकौर गांव से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बेरोजगार युवक के बैंक खाते में अचानक अरबों रुपये ट्रांसफर होने के मैसेज ने हड़कंप मचा दिया है। जानकारी के अनुसार, युवक का नाम दीपक उर्फ दीपू है। उसके कोटक महिंद्रा बैंक खाते में शुक्रवार 01 अगस्त 2025 को 1 अरब 13 लाख 55 हजार करोड़ रुपये जमा होने का मैसेज आया। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पुलिस और आयकर विभाग को भी चौंका दिया।

क्या है पूरा मामला?

दीपक उर्फ दीपू ग्रेटर नोएडा के ऊंची दनकौर गांव का निवासी है। हाल ही में कोटक महिंद्रा बैंक में अपना खाता खोला था। वह इस खाते का उपयोग UPI के जरिए लेन-देन के लिए करता था। लेकिन 01 अगस्त को दीपक के मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें दावा किया गया कि उसके खाते में 10,01,35,60,00,00,00,00,00,01,00,23,56,00,00,00,00,299 रुपये जमा हुए हैं। यह राशि यह राशि इतनी बड़ी थी कि इसे देखकर दीपक समेत पूरा इलाका स्तब्ध रह गया।

इस मैसेज के बाद दीपक ने बैंक से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन उसे बताया गया कि उसका खाता फ्रीज कर दिया गया है। इसके बाद मामला स्थानीय पुलिस और आयकर विभाग तक पहुंचा। जिन्होंने इसकी जांच शुरू की। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी और लोग तरह-तरह की अटकलें लगाने लगे।

पुलिस और बैंक की प्रतिक्रिया

इस मामले में थाना दनकौर पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे एक तकनीकी गड़बड़ी बताया। पुलिस के अनुसार, यह मैसेज NAVI UPI ऐप पर एक तकनीकी खराबी (टेक्निकल ग्लिच) के कारण आया हो सकता है, जिसके चलते ऐप पर गलत बैलेंस दिखाई दिया। जब दीपक ने अपने खाते को अन्य प्लेटफॉर्म, जैसे कि PhonePe, पर चेक किया, तो उसका बैलेंस शून्य ही दिखा। इसके अलावा बैंक स्टेटमेंट की जांच में भी खाते में कोई राशि जमा नहीं होने की पुष्टि हुई।

पुलिस और आयकर विभाग अब इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह वाकई एक तकनीकी त्रुटि थी, या इसके पीछे कोई बड़ा साइबर अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग का मामला हो सकता है। पुलिस ने बैंक से भी इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है और बैंक प्रबंधक के साथ मिलकर लेन-देन के स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।  

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