
मेरठ: राजधानी दिल्ली से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर मेरठ जिले गौतमबुद्ध नगर जिले में बसे बिसरख गांव को रावण की जन्मस्थली कहा जाता है। मान्यता है कि रावण के पिता के नाम पर ही इस गांव का नाम बिसरख पड़ा है। बताया जाता है कि रावण की माता का नाम केकसी और पिता का नाम विशेस्रवा था। विशेस्रवा को ही लोग विश्रवा ऋषि भी कहते हैं। विशेस्रवा पुलत्स्य ऋषि के पुत्र थे और पुलत्स्य ऋषि ब्रम्हा जी के मानस पुत्र कहे जाते हैं।
बताया जाता है कि ये गाँव रावण की जन्मस्थली है। यहीं पर रावण के दादा से लेकर रावण तक ने भी भगवान शिव की आराधना की है जिसका प्रमाण यहाँ विराजमान ये अष्टभुजी शिवलिंग है, इस शिवलिंग को अष्टकोणीय शिवलिंग भी कहा जाता है। मान्यता है कि जब देशभर में विजयदशमी की धूम होती है तब उस वक्त ये इलाका शोक में डूबा होता है। यहां के लोग रावण को अपना पूर्वज और भगवान मानते हैं। इसलिए यहां रावण का मंदिर भी बना दिया गया है। जहां हर दशहरे पर रावण और भगवान शिव का जलाभिषेक कर हवन यज्ञ किया जाता है।
साल में सिर्फ एक बार बाहर निकालते है रावण की मूर्ति
इस दिन ग्रामीण रावण के लिए नाना प्रकार के पकवान बनाते हैं और मन्दिर में आकर भोग लगाते हैं, हैरत की बात तो ये है कि रावण की मूर्ति को केवल वर्ष में एक बार ही बाहर निकाला जाता है और वो भी मात्र 2 घण्टे के लिए क्योंकि मूर्ति धातु की होने के कारण उसे गुप्त कक्ष में विराजमान किया हुआ है। लेकिन अब रावण के दर्शन करने वाले भक्तों के लिए एक मूर्ति अलग से स्थापित की जाएगी है।
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