
Raksha Bandhan Facts: भारत शायद विश्व में एकलौता देश है, जहां महीनों और रिश्तों के हिसाब से पर्व मनाए जाते हैं। हर महीने भारत में किसी न किसी हिस्सें में कोई ना कोई त्योहार जरुर मनाया जाता है। ऐसे ही अगस्त महीने का हर भाई- बहन को इंतजार रहता है। भाई-बहन के बीच स्नेह को दर्शाता रक्षाबंधन का त्योहार इस साल अगस्त महीने में मनाया जाएगा। भारत के बाजार भी राखियों से सज गई है। हालांकि, आपको पता है कि भाई के कलाई पर राखी बांधने का मुहर्रत होता है। कई लोग बिना मुहर्रत के राखी बांध लेते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि बिना मुहर्रत के राखी बांधना अशुभ होता है?
राखी में मुहर्रत का क्या महत्व होता है?
हर साल राखी के त्योहार से पहले लोग मुहर्रत जानने के लिए उत्सुक रहते हैं क्योंकि इस त्योहार का सबकुछ इसके मुहर्रत पर ही निर्भर करता है। सूर्य और चंद्रमा की गति पर मुहर्रत का समय निर्भर करता है। अगर आप सही समय पर राखी बांधते हैं, तभी उसका साकारात्मक असर दिखाई देगा। अगर मुहर्रत के समय को दरकरिनार करके राखी बांधी गई तो इसका शुभ प्रभाव नहीं पड़ेगा। राखी बांधने का समय गृह और नक्षत्रों से भी तय किया जाता है। इसलिए जानकारों की माने तो राखी को मुहर्रत के हिसाब से ही बांधे।
मुहर्रत नहीं मानने पर होंगे ये नुकसान
हिंदू धर्म में राखी को मुहर्रत के समय पर ना बांधने के कई नुकसान बताएं गए हैं। ज्योतिषियों की मानें तो भद्राकाल एक अशुभ समय होता है और इस समय पर कभी भी राखी नहीं बांधनी चाहिए। ऐसा करने पर या तय समय के विपरीत राखी बांधने का नकारात्मक परिणाम भुगतना पड़ सकता है। गलत समय पर राखी बांधने से भाई बहन के प्यार में कमी आ सकती है और दोनों के बीच कलह भी पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है। माना यह भी जाता है कि अगर कोई बहन भाई को गलत मुहर्रत पर राखी बांधती है तो इसका सबसे नकारात्मक प्रभाव भाई पर पड़ता है।
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