बेतिया राज की 15000 एकड़ जमीन पर बिहार सरकार का कब्ज़ा, कीमत जान उड़ जाएंगे होश

बेतिया राज की 15000 एकड़ जमीन पर बिहार सरकार का कब्ज़ा, कीमत जान उड़ जाएंगे होश

Bettiah Royal Family: बिहार का बेतिया राजघराना कई बड़े राजघरानाओं में से एक है। बेतिया राजघराना अपनी बेशकीमती जमीन के लिए जाना जाता है। लेकिन इस राजपरिवार की 15,215 एकड़ से ज्यादा जमीन अब बिहार सरकार के कब्जे में आ गई है। सरकार का कहना है कि इस बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जा हो रहा है।

क्या है पूरा मामला? 

दरअसल, बिहार के बेतिया राजघराना का कोई वारिस नहीं था। ऐसे में 'सेंट्रल प्रोविंस कोर्ट ऑफ वार्ड्स एक्ट' के तहत बिहार सरकार इस संपत्ति की देखरेख कर रही थी। बता दें, ये एक्ट भारत की आजादी से पहले का है। इस एक्ट के तहत सरकार ऐसी संपत्तियों की देखभाल करती है, जिनके मालिक मानसिक तौर पर अस्वस्थ हो या नाबालिग। इसके अलावा किसी परिवार का वारिस न होना।

इसलिए बिहार के बेतिया राजघराना का कोई वारिस नहीं होने से बिहार सरकार अब इस प्रॉपर्टी की देखरेख करेगी। वहीं, बिहार सरकार का प्लान है कि वह यूपी में स्थित बेतिया राज की जमीन का कब्जा भी ले लेगी। बता दें, बिहार विधानसभा में इसे लेकर एक बिल भी पास हो चुका है। 

नहीं था कोई उत्तराधिकारी

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बेतिया राज की शुरुआत चंपारण क्षेत्र में हुई। बताया जाता है कि इसका इतिहास उज्जैन सिंह और उनके बेटे गज सिंह से जुड़ा है। इन्हें 17वीं शताब्दी में बादशाह शाहजहां ने इन्हें राजा की उपाधि दी। 18वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य के पतन के दौरान यह परिवार स्वतंत्र हो गया। वहीं, बेतिया राज के आखिरी राजा हरेंद्र किशोर सिंह की 1893 में मौत हो गई। इसके बाद उनकी पहली पत्नी को राज संपत्ति की जिम्मेदारी दी गई थी। क्योंकि उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं था।

लेकिन साल 1896 में उनकी उनकी पहली पत्नी की मौत हो गई। इसके बाद ये जिम्मेदारी राजा की दूसरी पत्नी महारानी जानकी कुंवर को दी गई। लेकिन ब्रिटिश राज में ही इस संपत्ति की जिम्मेदारी 1897 में कोर्ट ऑफ वार्ड्स मैनेजमेंट के अधीन आ गई।

क्या था कोर्ट ऑफ वार्ड्स?

कोर्ट ऑफ वार्ड्स के नियंत्रण में आने के बाद से इसे बेचा या किसी को हस्तांतरित नहीं किया जा सका। दरअसल, कोर्ट ऑफ वार्ड्स एक कानूनी निकाय था, जो तब तक उत्तराधिकारियों और उनकी सम्पदा की रक्षा करता था। जब उत्तराधिकारी को नाबालिग माना जाता था। ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1797 में कोर्ट ऑफ वार्ड्स की स्थापना की, जो 1540 से 1660 तक अस्तित्व में रहे इंग्लिश कोर्ट ऑफ वार्ड्स एंड लिवरीज पर आधारित था।  

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