“इसे नमाजवाद कहा जाए”, वक्फ संशोधन कानून विरोधी रैली को लेकर राजद-कांग्रेस पर भड़की BJP

“इसे नमाजवाद कहा जाए”, वक्फ संशोधन कानून विरोधी रैली को लेकर राजद-कांग्रेस पर भड़की BJP

Anti Waqf Bill Rally Patna: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के द्वारा बिसात बिछानाशुरु हो गया है। रविवार को इसकी एक झलक भी पटना के गांधी मैदान में देखने को मिला। वक्फ संशोधन बिल के विरोध में आयोजित सम्मेलन में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग पहुंचे। मंच पर बिहार के तमाम विपक्षी दलों के नेताओं को जगह दी गई। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर जमकर निशाना साधा। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उनकी सत्ता बिहार में आती है तो वो वक्फ कानून को कुड़ेदान में फेंक देंगे। अब इस पर भाजपा ने पलटवार किया है। राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हम संविधान को कुड़ेदान में फेंकने नहीं देंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि देश शरिया से नहीं संविधान से चलेगा।

“कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे”

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "हाल ही में भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे भयावह अध्याय आपातकाल के 50 वर्ष पूरे हुए। लेकिन यह बेहद दुखद है कि कल पटना के उसी गांधी मैदान में, जहां आपातकाल के दौरान लाखों लोग संविधान की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना जुटे थे, एक रैली आयोजित की गई जिसमें तेजस्वी यादव ने कहा कि हम संसद द्वारा पारित कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे। उन्होंने वक्फ एक्ट के बारे में कहा कि हम इसे कूड़ेदान में फेंक देंगे, जबकि इसे भारतीय संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया है। इसका मतलब है कि संसद, न्यायपालिका के प्रति कोई सम्मान नहीं है। तेजस्वी यादव और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के अन्य नेताओं ने वोट बैंक के चक्कर में जो कुछ भी कहा है, उससे यह स्पष्ट है कि वे संविधान को कूड़ेदान में फेंकने की 50 साल पुरानी मानसिकता से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।"

“समाजवाद के विचार से बिल्कुल विपरीत”

सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा,"भाजपा और NDA गठबंधन इस बात के लिए गत संकल्पित है कि बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान को और उसके किसी भी प्रावधान को कोई कूड़े में फेंकना चाहेगा तो हम उसे नहीं होने देंगे। मैं INDI गठबंधन से पूछना चाहता हूं कि क्या आप बिहार में साउदी अरब, इंडोनेशिया, तुर्की और ISIS से ज्यादा बड़ा शरिया कानून लागू करने की सोच रहे हैं? हमें इस बात का सीधा और स्पष्ट जवाब चाहिए। मैं राजद और सपा जैसे दलों से पूछना चाहता हूं कि समाजवाद तो धन का समान वितरण होना चाहिए यह कहता है लेकिन आप कह रहे हैं कि 49 लाख एकड़ जमीन पर चंद लोगों का कब्जा होना चाहिए। यह एक सोची समझी मानसिकता है जो समाजवाद के विचार से बिल्कुल विपरीत है।"

“इसे नमाजवाद कहा जाए”

सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा, "समाजवाद का चोला ओढ़े ये दल जैसे आरजेडी, समाजवादी पार्टी आदि गरीब और दबे-कुचले मुसलमानों के हक के लिए खड़े नहीं हो रहे हैं। इसलिए आरजेडी और एसपी के समाजवाद को कतई समाजवाद नहीं कहा जा सकता। अगर इसे नमाजवाद कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। बीजेपी और एनडीए गठबंधन इस बात पर अड़ा हुआ है कि अगर कोई बाबा साहब अंबेडकर के संविधान को, उसके किसी भी प्रावधान को कूड़ेदान में फेंकना चाहेगा तो हम ऐसा नहीं होने देंगे।"

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