अमरनाथ यात्रा से भी दुर्गम है इस जगह की यात्रा, न चलते हैं घोड़े न खच्चर

अमरनाथ यात्रा से भी दुर्गम है इस जगह की यात्रा,  न चलते हैं घोड़े न खच्चर

Ajab Gajab: सावन का महीना शुरू हो चुका है। हिंदू धर्म में ये महीना खास महत्व रखता है क्योंकि इसे भगवान शिव का महीना माना जाता है।इस महीने में शिव के धाम पर यात्रियों की अपार भीड़ होती है। चाहे वो अमरनाथ हो या केदारनाथ। अमरनाथ सबसे दुर्गम यात्रा मानी जाती है लेकिन एक यात्रा अमरनाथ यात्रा से भी दुर्गम है जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है। हम बात कर रहे हैं कुल्लू के आनी में विराजमान श्रीखंड महादेव की। यहां 18570 फीट की ऊंचाई पर चढ़ना होता हैं वहीं अमरनाथ में महज 1400 फीट की चढ़ाई होती है। सिर्फ चढ़ाई ही नहीं यहां का रास्ता भी बेहद खतरनाक है।

सबसे दुर्गम यात्राओं में है शामिल

 दुनिया की सबसे दुर्गम धार्मिक यात्राओं में शामिल होने के बावजूद श्रीखंड यात्रा के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यात्रा में पहुंचते हैं। आप इसके लिए निरमंड से भी पहुंच सकते हैं। सनिरमंड से श्रीखंड यात्रा के लिए 25 किलोमीटर की सीधी चढ़ाई श्रद्धालुओं के लिए किसी बहुत कठिन यात्रा से कम नहीं होती है। कई बार तो इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मौत भी हो जाती है। कहा जाता है की कैलाश मानसरोवर की यात्रा बहुत कठिन और दुर्गम यात्रा होती है। उसके बाद अमरनाथ की यात्रा को लेकर भी यही मानना है, किन्तु हिमाचल प्रदेश के श्रीखंड महादेव की यात्रा अमरनाथ यात्रा से भी ज्यादा कठिन यात्रा होती है।श्रीखंड महादेव के कठिन रास्तों में खच्चर नहीं चल सकता अमरनाथ यात्रा के दौरान लोग जहां खच्चरों का सहारा लेते हैं। वहीं, श्रीखण्ड महादेव की 35 किलोमीटर की इतनी कठिन चढ़ाई है, जिसपर कोई खच्चर घोड़ा चल ही नहीं सकता। श्रीखण्ड का रास्ता रामपुर बुशैहर से जाता है। यहां से निरमण्ड, उसके बाद बागीपुल और आखिर में जांव के बाद पैदल यात्रा शुरू होती है।

भगवान शिव का है वास

हिमाचल के शिमला के आनी उममंडल के निरमंड खंड में स्थित बर्फीली पहाड़ी की 18570 फीट की ऊंचाई पर श्रीखंड की चोटीपर स्थित है। सुंदर घाटियों के बीच से गुजरता है ट्रैक 18 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड यात्रा के दौरान सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की भी कमी पड़ती है। 35 किलोमीटर की जोखिम भरी यात्रा के बाद ही यहां पहुंचते हैं। यहां पर स्थित शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 72 फिट है। श्रीखंड महादेव की यात्रा के मार्ग में निरमंड में सात मंदिर, श्रीखंड से करीब 50 मीटर पहले पार्वती, गणेश व कार्तिक स्वामी की प्रतिमाएं भी हैं। जाओं में माता पार्वती का मंदिर, परशुराम मंदिर, दक्षिणेश्वर महादेव, हनुमान मंदिर अरसु, जोताकली, बकासुर वध, ढंक द्वार आदि कई पवित्र स्थान है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस चोटी पर भगवान शिव का वास है।

यात्रा के पड़ाव

यात्रा के तीन पड़ाव हैं, सिंहगाड़, थाचड़ू, और भीम डवार है। यहां की यात्रा जुलाई में शुरु होती है जिसे श्रीखंड महादेव ट्रस्ट द्वारा आयोजित किया जाता है। यह ट्रस्ट स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी कई सुविधाएं प्रशासन के सहयोग से उपलब्ध करवाता है। सिंहगाड, थाचड़ू, भीमडवारी और पार्वतीबाग में कैंप स्थापित हैं। सिंहगाड में पंजीकरण और मेडिकल चेकअप की सुविधा है, जबकि विभिन्न स्थानों पर रुकने और ठहरने की सुविधा है। यहां कैंपों में डॉक्टर, पुलिस और रेस्क्यू टीमें तैनात रहती हैं। श्रीखंड महादेव पहुंचने के लिए शिमला जिला के रामपुर से कुल्लू जिला के निरमंड होकर बागीपुल और जाओं तक गाड़ियों और बसों में पहुंचना पड़ता है। जहां से आगे करीब तीस किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी होती है।

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