
नई दिल्ली: होली का त्योहार बेहद नजदीक आ चुका है। वैसे तो होली की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं लेकिन जो अभी रंग, गुलाल आदि की खरीददारी नहीं कर सके हैं वे बाजारों का रुख कर रहे हैं। होली जलाए जाने के बाद रंगप्रेमी अपने-अपने तरीके से रंगों से सराबोर होंगे। बच्चों को भले ही घरों से बाहर निकलने को मना किया गया हो लेकिन भला कहां मानेंगे? घरों की छतों और छज्जों से ही राहगीरों को भिगोने के लिए उन्होंने पूरी तैयारी कर रखी है। वे अभी से पिचकारी और पानी वाले गुब्बारों के साथ नजर आ रहे हैं.
एक बात ध्यान देने की है कि होली का त्योहार किसी को बेहद पसंद है तो ऐसे भी तमाम लोग हैं जो होली खेलना पसंद नहीं करते। लेकिन जो पसंद करते हैं उन्होंने अपना प्लान तैयार भी कर लिया है कि उन्हें कहां और किन दोस्तों के साथ होली खेलनी है। जहां तक संभव हो होली सूखे रंगों से ही खेलें या फिर टेसू के फूलों से ही रंग घर पर ही तैयार करें क्योंकि बाजार के रंगों में खतरनाक रसायन होते हैं जिनसे त्वचा को नुकसान होता है और खास बात ये है कि होली के दिन जहां तक बने पुराने और मजबूत कपड़े ही पहनें।
विशेष रूप से बच्चों को फुल पेंट व शर्ट पहनाना चाहिए क्योंकि जिससे शरीर पर गहरा रंग जमने से वे बच सकें. मेहमान घर पर आएं न आएं आखिर होली पर स्पेशल डिश भी तो होनी चाहिए इसलिए बाजार से खरीद ली हैं तो अच्छा आप घर पर ही मिठाई तैयार कर सकते हैं।
हर्बल रंगों की बढ़ रही डिमांड
होली पर खास तौर पर इस बात का ध्यान रखें कि कोरोना ने माहौल को संदेहजनक बना रखा है ऐसे में किसी को भी जबरदस्ती रंग ना लगाएं इससे आपसी संबंधों में खटास आ सकती है। तो खुद को और औरों को भी सुरक्षित रखें और में हर्बल रंगों से ही होली खेलें। यह महंगे जरूर हैं पर सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। वैसे बाजारों में 100 में से 50 लोग हर्बल और ऑर्गेनिक कलर मांगते थे, उनकी संख्या अब बढ़कर 80 हो गई है।
कुल मिलाकर कोरोना के डर का साया इस बार की होली पर साफ तौर पर देखा जा सकता है। होली के लिए बाजारों में व्यापारियों ने जो माल मंगाया था वह ज्यादातर मात्रा में गोदामों में पड़ा हुआ है। दरअसल होली को ज्यादातर माल हम चाइना से मंगाते थे लेकिन चीन में कोरोना के हालातों के मद्देनजर लोग चाइनीज माल की बिक्री से बच रहे हैं।
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