
Taj Mahal Land Ownership: सुप्रीम कोर्ट में आज वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इन याचिकाओं की सुनवाई CJI संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने की। वहीं, इस मामले की अगली सुनवाई कल दोपहर 2 बजे होगी। लेकिन इसी बीच, ताजमहल की जमीन को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। ताजमहल की जमीन किसकी जमीन पर बना है? वक्फ की या हिंदूओं की। आइए जानते है क्या है पूरा मांजरा?
क्या है पूरा मामला?
इन दिनों देश में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर बहस हो रही है। ये विवाद इतना बढ़ गया कि आज इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई। लेकिन इसी बीच, अब ताजमहल की जमीन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब हर किसी के मन में है कि ताजमहल की जमीन किसकी जमीन पर बना है? वक्फ की या हिंदूओं की।
बता दें, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब ताजमहल पर सवाल उठ रहे है। इससे पहले भी ताजमहल पर कई सवाल उठ चुके हैं। एक बार दावा किया गया था कि ताजमहल मंदिर की जमीन पर बना हुआ है। तो वहीं, एक बार दावा किया गया था कि ताजमहल जयपुर राजघराने की संपत्ति पर बना है। लेकिन आजतक इस बात का सही जवाब नहीं मिल सका।
बादशाहनामा किताब में क्या बताया गया
इतिहास की तरफ देखें तो शायद इसका जवाब मुगलकालीन लेखक अब्दुल हमीद लाहौरी की किताब बादशाहनामा में मिल सकता है। बता दें, ये किताब मुगल सम्राट शाहजहां के शासनकाल के दौरान लिखी गई थी। इस किताब में उनकी पूरी जीवनी लिखी गई थी। इस किताब की मानें तो ताजमहल राजा जय सिंह की जमीन पर बनाया गया था।
बता दें, मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल का निर्माण कराया था। ऐसा कहा जाता है कि ताजमहल में शाहजहां की बेगम मुमताज की कब्र बनी हुई है।
राजपूत राजघराने की जमीन पर बना ताजमहल?
अब्दुल हमीद लाहौरी की लिखी हुई किताब बादशाहनामा के अनुसार, ताजमहल की जमीन जयपुर के राजपूत राजघराने के राजा जय सिंह की है। किताब के अनुसार, शाहजहां को अपनी बेगम मुमताज़ के लिए एक मकबरा बनवाना था। जिसके लिए उनके नजर यमुना किनारे उस ज़मीन पर पड़ी, जहां आज ताजमहल बना हुआ है। उस समय शाहजहां को वो ज़मीन बहुत पसंद आई थी।
जिसके बाद उन्होंने राजा जय सिंह से आग्रह कर वो जमीन उनसे ले ली। इसके बदले में शाहजहां ने राजा जय सिंह को आगरा में चार हवेलियां दी थी। इस बात का दावा 17वीं सदी के कई सारे ऐतिहासिक दस्तावेजों में किया गया हैं।
सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल
ऐतिहासिक दस्तावेजों और बादशाहनामा किताब की मानें तो ताजमहल की जमीन ना वक्फ की थी और ना ही जबरन कब्जा की गई थी। बल्कि ये दोनों पक्षों की तरफ से किया गया वैध लेन-देन था। बता दें, हाल ही में सोशल मीडिया पर ताजमहल की जमीन को लेकर कई सवाल उठाए गए थे।
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