
Maa Katyayani: नवरात्रि के छठें दिन नवदुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाती है। माता को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा उन्हें जगत की जननी भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि माता की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं, जो अवैवाहिक व्यक्ति सच्चे मन से माता की पूजा- अर्चना करता है, उसके विवाह के योग बनते हैं। माता की कृपा से व्यक्ति को समान विचारधारा वाला साथी मिलता है।
कैसा है माता कात्यायनी का स्वरूप?
शास्त्रों की मानें तो मां कात्यायनी का जन्म महर्षि कात्यायन के घर हुआ था। इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यानी का स्वरूप दिव्य और भव्य है। माता की चार भुजाएं हैं। माता के एक हाथ अभय मुद्रा में और दूसरा वर मुद्रा में है। वहीं, उनके तीसरे हाथ में तलवार और चौथे हाथ में कमल है। माता का वाहन सिंह है।
पूजा विधि
नवरात्रि के छठे दिन सबसे पहले सुबह स्नान करें। इसके बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा करते समय हाथ में फूल लेकर देवी कात्यायनी का ध्यान करें। इसके बाद उन्हें लाल फूल, अक्षत, कुंकुम और सिन्दूर चढ़ाएं। फिर घी या कपूर जलाकर आरती करें। इसी के साथ देवी के मंत्रों का जाप भी करें।
मां कात्यायनी का प्रिय रंग
मां कात्यायनी को लाल रंग प्रिय है। इसके अलावा माता को पीला रंग भी बहुत पसंद है। इसलिए पूजा करते समय इन रंगों के वस्त्र जरूर पहनें।
मां कात्यायनी का भोग
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा के समय शहद का भोग लगाना चाहिए। इससे मां प्रसन्न होती है और भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। इसी के साथ जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहती है।
मां कात्यायनी का मंत्र
चंद्रहासोज्ज्वलकरा, शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्यात्, देवी दानवघातनी।।
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