
Ganesh Visarjan 2024: गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस 10दिनों के धार्मिक उत्सव के समापन पर, गणपति बप्पा की विदाई का समय आता है, जिसे गणेश विसर्जन कहा जाता है। हिंदू धर्म में गणेश विसर्जन का विशेष धार्मिक महत्व है।
यह मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणपति बप्पा अपने भक्तों के घर आकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं और फिर एक साल के लिए विदा हो जाते हैं। विसर्जन के दौरान बप्पा को जल में विसर्जित करके उन्हें खुशी और उल्लास के साथ अगली बार आने के लिए विदा किया जाता है। विसर्जन के दौरान कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है, जिन्हें जानना महत्वपूर्ण है।
गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त
गणेश विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी पर शुभ मुहूर्त का समय द्रिक पंचांग के अनुसार सुबह 9:10बजे से दोपहर 1:47बजे तक है। इस समय गणपति बप्पा की मूर्ति का विसर्जन करने से शुभ फल की प्राप्ति की मान्यता है।
गणेश विसर्जन के दौरान इन नियमों का करें पालन
शुभ मुहूर्त में करें पूजा
विसर्जन का समय बहुत महत्वपूर्ण है। पंचांग के अनुसार, विसर्जन शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए ताकि पूजा से प्राप्त शुभ फल सुनिश्चित हो सकें।
विधि-विधान से करें पूजा
विसर्जन से पहले गणपति बप्पा की विधिवत पूजा करें और फिर आरती के बाद उनकी विदाई की कामना करें।
मूर्ति का आकार
मूर्ति का आकार विसर्जन स्थल के आधार पर निर्भर करता है। छोटी मूर्तियों का विसर्जन घर के आसपास के तालाब या नदी में किया जा सकता है, जबकि बड़ी मूर्तियों को बड़ी नदी में विसर्जित किया जाना चाहिए।
अगले वर्ष के लिए आशीर्वाद
विसर्जन के समय गणपति बप्पा से अगले साल फिर से आने का और आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करें।
गणेश विसर्जन के दौरान करें इन मंत्रों का जाप
“ॐ गण गणपतये नमः”
यह सरल मंत्र गणेश जी को समर्पित है और जीवन की बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।
॥ॐ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
इस मंत्र के जाप से गणेश भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं।
गणेश विसर्जन का महत्व
गणेश विसर्जन हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है जो गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय उत्सव का समापन करता है। यह केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि इसमें गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। दस दिनों तक घर में गणपति बप्पा की पूजा अर्चना के बाद भक्त भावुकता के साथ उन्हें विदा करते हैं। विसर्जन के माध्यम से बप्पा को विदा किया जाता है, और इस दौरान लोग एक साथ आकर सामाजिक बंधनों को मजबूत करते हैं। इस त्योहार को प्यार और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
Leave a comment