तय समय से लगभग 34 मिनट पहले पहले ISS पहुंचे शुभांशु शुक्ला, जानें उनके 14 दिनों का अंतरिक्ष प्लान

तय समय से लगभग 34 मिनट पहले पहले ISS पहुंचे शुभांशु शुक्ला, जानें उनके 14 दिनों का अंतरिक्ष प्लान

Axiom Mission Live: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का Axiom-4 मिशन आखिर पूरा हो ही गया है। इसके लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से अपने चार साथी एस्ट्रोनॉट संग ऐतिहासिक उड़ान भरी है। करीब 28 घंटों का सफर तय करने के बाद स्पेसक्राफ्ट ISS पहुंचा। अब अंतरिक्ष यान 'ड्रैगन' स्पेस स्टेशन से डॉक कर चुका है। बता दे, कि ड्रैगन कैप्सूल अपने निर्धारित समय से लगभग 20 मिनट पहले डॉक हुआ है। बता दें कि तय समय से लगभग 34 मिनट पहले पहले यान स्पेस स्टेशन पहुंचा। मिशन से पहले क्रू ने स्पेसक्राफ्ट से बातचीत की।

अंतरिक्ष से शुभांशु शुक्ला का पहला संदेश

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर बढ़ते हुए, उन्होंने अंतरिक्ष से भारत के लिए पहला संदेश भेजा है। SpaceX के ड्रैगन यान से भेजे गए इस संदेश में उन्होंने कहा, "सभी को अंतरिक्ष से नमस्ते! मैं यहां एक बच्चे की तरह नई-नई चीजें सीख रहा हूं।" यह संदेश न केवल उनकी उत्सुकता को दर्शाता है, बल्कि भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक पल भी है। बता दें, कि शुभांशु शुक्ला 14 दिनों तक स्पेस में रहेंगे। इस दौरान वो सात एक्सपेरिमेंट करेंगे। यह प्रयोग कई भारतीय संस्थानों की ओर से बढ़ाए गए हैं।

शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष में सात अनोखे प्रयोग

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में सात महत्वपूर्ण प्रयोग करेंगे। पहला प्रयोग माइक्रोग्रैविटी के मांसपेशियों पर प्रभाव का अध्ययन करेगा, जो अंतरिक्ष यात्रियों की मांसपेशियों की कमजोरी को समझने में मदद करेगा। दूसरा प्रयोग फसलों के बीजों के जेनेटिक गुणों पर माइक्रोग्रैविटी के असर को देखेगा, जबकि तीसरा टार्डीग्रेड्स, दुनिया के सबसे सहनशील जीव, पर अंतरिक्ष के प्रभाव का विश्लेषण करेगा। चौथा प्रयोग सूक्ष्म शैवाल (माइक्रोएल्गी) पर होगा, ताकि यह पता लगे कि ये भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के पोषण का स्रोत बन सकते हैं। पांचवां प्रयोग मूंग और मेथी के बीजों के अंकुरण पर केंद्रित है, जो अंतरिक्ष में खेती की संभावनाओं को जांचेगा। छठा प्रयोग अंतरिक्ष स्टेशन में दो प्रकार के बैक्टीरिया पर शोध करेगा, और सातवां प्रयोग माइक्रोग्रैविटी में कंप्यूटर स्क्रीन के आंखों पर प्रभाव को समझेगा। ये प्रयोग भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

 

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