
UN: पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। उन्होंने अपने देश की चिंता किए बगैर फिलिस्तीन से कश्मीर की तुलना कर दी। भारत ने हर बार की तरह इस बार भी अपना रूख साफ किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग थे, हैं और हमेशा रहेंगे।
आतंकवादियों को आश्रय देने वाला देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र की बैठक में कश्मीर को लेकर बहुत कुछ कहा है। उन्होंने कहा कि स्थायी तौर पर शांति सुनिश्चित करने के लिए भारत को अनुच्छेद 370 को वापस लाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत में शामिल होना चाहिए। भारत कश्मीर में एकतरफा और मनमानी कदम उठा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के अधिकारों पर बोले शहबाज
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, 'फिलिस्तीन के लोगों की तरह जम्मू-कश्मीर के लोगों ने भी अपनी आजादी और आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए एक सदी तक संघर्ष किया है। शांति की दिशा में आगे बढ़ने के बजाए, भारत जम्मू-कश्मीर पर सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने की प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गया है। ये प्रस्ताव जम्मू और कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णय के अपने मौलिक अधिकार का प्रयोग करने में सक्षम बनाने के लिए जनमत संग्रह का आदेश देते हैं।'
इस्लामोफोबिया पर जताई चिंता
उन्होंने कहा कि इस्लामोफोबिया का बढ़ना ऐसा वैश्विक घटनाक्रम है जो चिंताजनक है। भारत में हिंदू श्रेष्ठतावादी एजेंडा इस्लामोफोबिया की सबसे चिंताजनक अभिव्यक्ति है। उम्मीद की जा रही है कि भारत उत्तर देने के अपने अधिकार के तहत पाकिस्तान के आरोपों का करारा जवाब देगा।
भारत पर लगाए कई आरोप
इसके साथ ही अपने संबोधन में उन्होंने भारत पर अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार करने और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर कब्जा करने के लिए नियंत्रण रेखा पार करने की धमकी देने का आरोप लगाया। इसके युद्ध सिद्धांतों में एक आश्चर्यजनक हमले और परमाणु खतरे के तहत एक सीमित युद्ध की परिकल्पना की गई है।
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