मानव संवेदना को बचाए !

मानव संवेदना को बचाए !

नई दिल्ली: हालात कब बदल जाए और खतरा कब आकर सवार हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. ऐसी ही कुछ परिस्थितियां कई धारणाओं को तोड़ने और नई धारणाओं को जन्म देती है. एक ही घटनाक्रम को बार बार देखने के बाद कई तरह के निष्कर्ष पर पहुंचा हूं.

अक्सर, आजकल घंटोभर की चैं- चैं से आंख खुलती है. दिल्ली में जहां मेरा एक किराए का कमरा है, वहां बाहर बालकनी में कबूतर के एक जोड़े ने घोंसला बनाया हुआ हैं. कुछ दिन पहले अंडा दिया और अब नवजात कबूतर बाहर निकल आया है. कबूतर युगल बड़ी ही निष्ठा और पारिवारिक जिम्मेदारी से बच्चे की परवरिश कर रहा है. मैं इसे देखकर श्रद्धा भाव से भर जाता और आत्मसात हो उठता हूं.

वहीं, कौवों को कबूतरों की हंसती खेलती जिंदगी देखी नहीं जाती और सुबह सुबह आकर कौवों का एक ग्रुप पूरी ताकत के साथ कबूतरों पर हमला करता. कबूतर युगल भी सक्रिय होकर पूरी एकजुटता से हमले का सामना करते. कौवों को मुंह की खाकर जाना पड़ता. कमरे से दूर करीब 30 कदम की दूरी पर एक पार्क में बड़ा पेड़ है. पेड़ पर भी दूसरे पक्षियों की तान सुनाई देती. वे इस पूरे घटनाक्रम को साक्षी भाव से देखते और लौट जाते.

कई बार मकान मालिक के साथ इस बात को लेकर बहस भी हुई क्योंकि, मकान मालिक घोंसले और नवजात कबूतर को बाहर पार्क में रखने की बात कहता. मैं कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल देता.

मैं ऐसा इसलिए भी करता हूं, जब दिल्ली से घर जाता हूं तो रास्ते रेलवे स्टेशनों पर हजारों सैंकड़ों बेघर खानाबदोश परिवार को देखता हूं, ये सब देखकर मन भरकर भावुक हो जाता है. महान शायर बसीर बद्र साहब की कुछ पंक्तियां दिमाग में कौंदने लगती.

।लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में।

तुम तरस नहीं खाते, बस्तियां मिटाने में।

खैर, अभी तक मेरी देख रेख में कबूतर परिवार सुरक्षित है. मैं भी खुद अपने आप कबूतरों के उड़ जाने का इंतजार कर रहा हूं. इस पूरे घटनाक्रम ने नई धारणाओं को जन्म दिया हैं.

1. परिस्थिति लड़ना सीखा देती है.

2. अनपढ़ और अमर्यादित कहे जाने वाले पक्षी भी हमें बहुत कुछ सिखाते हैं.

3. खतरा कभी भी आ सकता है.

4. विपत्ति के समय एकजुट रहे.

5. अनपढ़ पक्षी भी unity is straight को जानते हैं.

6. विपरीत हालातों का डटकर सामना करें.

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