
Harish Salve on Hindenburg: अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग ने एक बार भी अदाणी को निशाना बनाते हुए कई दावे किए हैं। हालांकि, इस बार हिंडनबर्ग ने सेबी चीफ माधबी बुच पर भी अदाणी के साथ आर्थिक हिस्सेदारी होने के आरोप लगाए हैं। लेकिन इस आरोपों के बाद भी शेयर मार्केट पर इसका असर देखने को नहीं मिला। इस बीच वरिष्ट वकील हरिश साल्वे ने हिंडनबर्ग पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने हिंडनबर्ग पर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे को समर्थन देने को लेकर विपक्ष पर भी निशाना साधा है। बता दें, पिछले साल हिंडनबर्ग ने अदाणी के खिलाफ एक दस्तावेज लाकर शेयर मार्केट में हलचल ला दी थी। इस बार भी हिंडनबर्ग के द्वारा जो बातें पेश की गई, माना जा रहा था कि एक बार फिर इसका असर शेयर बाजार पर पड़ेगा। लेकिन कुछ खास असर इसका शेयर बाजार पर नहीं पड़ा है।
“भारत का मजाक उड़ा रहा”
पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कहा कि हिंडनबर्ग भारत का लगातार मजाक उड़ा रहा है। साल्वे ने कहा कि अगर हिंडनबर्ग रिसर्च जैसे संगठनों पर लगाम नहीं लगाई गई तो इस तरह के संगठन एक दिन देश की न्यायपालिका पर सवाल उठाएंगे। उन्होंने कहा कि हिंडनबर्ग रिसर्च अमेरिका में बदनाम है। हालांकि, भारत में कई लोग इस पर भरोसा कर रहे हैं और इसकी रिपोर्ट को विश्वसनीयता मान रहे हैं।पूर्व सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि भारत में किसी भी संस्थान पर लोग बेबुनियाद आरोप लगाते हैं और बच भी जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संस्थान भारत का मजाक उड़ा रहा है।
विपक्ष पर भी साधा निशाना
पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने इस मामले में विपक्ष पर भी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को कोई भी देश महत्व नहीं देता है। सभी इसके रिपोर्ट को कूड़े के ढेर के समान मानते हैं। हालांकि, भारत में यह सेबी को धमकाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इस मामले पर विपक्ष की जमकर आलोचना की है। हरीश साल्वे ने कहा कि राजनीतिक नेताओं का एक वर्ग हिंडेनबर्ग को गंभीरता से ले रहा है, जो कि शर्मनाक है।
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में क्या है?
नई रिपोर्ट जारी करने के बाद हिंडनबर्ग ने कहा था कि अदाणी समूह पर हमारी मूल रिपोर्ट को आए लगभग 18 महीने बीत चुके हैं। इस दौरान कई ठोस सबूत पेश किए गए। साथ ही 40 से अधिक स्वतंत्र मीडिया जांच की गई लेकिन अभी तक सेबी ने अदाणी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। साथ ही उन्होंने कहा कि पर्याप्त सबूत पेश किए जाने के बाद, यह स्पष्ट हो जाता है कि ये कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है लेकिन कार्रवाई के बजाय साल 2024 में सेबी ने हमें एक कारण बताओ नोटिस भेजा था। गुप्त दस्तावेज के हवाले से हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा था कि अदाणी घोटाले में इस्तेमाल की गई ऑफशोर संस्थाओं में सेबी चेयरपर्सन और उनके पति की हिस्सेदारी थी। इन संस्थाओं का संचालन कथित तौर पर अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी के बड़े भाई विनोद अदाणी करते हैं।
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