Sarva Pitru Amavasya Daan: पूर्णिमा श्राद्ध की अवधि 15-16 दिन की होती है। इस दौरान परिवार अपने पूर्वजों का श्राद्ध और पिंडदान करते है। जिससे उनकी आत्मा को संतुष्टि मिलती है। लेकिन कई बार काम के चलते, यात्रा या बीमारी केी वजह से समय पर श्राद्ध करना रह जाता है। ऐसे स्थिति में पितृ पक्ष के आखिरी दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। धार्मिल मान्यताओं के अनुसार, इस दिन खास तौर पर पितरों के लिए पूजा-पाठ, दान-पुण्य किया जाता है। जिससे उनका आशीर्वाद हमेशा परिवार पर बना रहता है। तो चलिए सर्वपितृ अमावस्या की तारीख और दान-पुण्य के बारे में जानते है।
सर्वपितृ अमावस्या की तारीख
हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरूआत 09 अक्टूबर 2026 की रात 9:35 बजे होगी। इसका समापन अगले दिन 10 अक्टूबर रात 9:19 बजे तक होगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर 10 अक्टूबर को ही सर्वपितृ अमावस्या है। इसी दिन पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाएगा।
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सर्वपितृ अमावस्या के दिन करें दान-पुण्य
1. अन्न और जल का जरूर करें दान
सर्वपितृ अमावस्या के दिन अन्न और जल का दान जरूरी माना जाता है। सनातन धर्म में जरूरतमंद को भोजन कराना, अन्न या जल का दान करना फलदायी माना जाता है। अन्न दान के लिए गेहूं, चावल, दाल और तिल का चुनाव किया जाता है। इस दान से पितरों के साथ अन्नपूर्णा मां का भी आर्शीवाद मिलता है।
2. जरूरतमंद को भोजन कराना
हिंदू धर्म में हमेशा से ही ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान देना या उन्हें भोजन कराना अच्छा संकेत माना जाता है। ऐसे में श्राद्ध के समय इस कार्य को करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।