Langur in Kanya Pujan: जब हम भी बच्चे हुआ करते थे, तो कंजक में जाया करते थे। नवरात्रि के नौ दिन शुरू होते ही सबसे ज्यादा इंतजार कन्या पूजन का ही होता था। इस दौरान घरों में हलवा,पूरी और काले चने का प्रसाद बनता है और कंजक जमाते है, यानी कन्या पूजन करते है, जिसमें उन्हें अच्छे-अच्छे गिफ्ट्स और पैसे मिलते है। नवरात्रि के नौ दिन माता रानी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में कन्या पूजन इसी का हिस्सा माना जाता है, इसलिए अष्टमी और नवनी के दिन नौ कन्याओं के साथ एक बटुक को कंजक के रूप में बुलाया जाता है। माता रानी के नौ रुपों के आधार पर कन्या पूजन के लिए नौ कन्याओं को भोजन कराया जाता है, लेकिन उनके साथ एक लड़का जरूर आता है, जिसे लंगूर या बटुक भैरव बोला जाता है। लेकिन कभी आपने सोचा है, नौ कन्याओं के बीच एक लड़के का क्या काम। तो चलिए इसके पीछे के रहस्य को जानते है।
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लंगूर या बटुक भैरव क्यों बैठाया जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्या पूजन के दौरान लंगूर को बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि बटुक भैरव भगवान शिव के गण हैं। साथ ही, उन्हें मां दुर्गा का द्वारपाल और रक्षक भी कहा जाता है। इसलिए कन्या पूजन के नौ कन्याओं के साथ एक लड़के (लंगूर या बटुक) को बैठाना जरूरी होता है, तभी पूजा सफल मानी जाती है। बटुक के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। इसके अलावा हनुमान जी को भी लंगूर रूप में देखा जाता है। ऐसे में हनुमान जी की फोटो या उनकी मूर्ति बैठाने का भी शुभ माना जाता है।
कन्या पूजन का महत्व
मालूम हो कि कन्या पूजन नवरात्रि के अष्टमी और नवमी के दिन किया जाता है। इस दौरान 2 से 10 साल की कन्याओं को माता का रूप माना जाता है औऱ उन्हें शुद्ध शाकाहारी भोजन मुख्य रूप से हलवा, पूरी और चने का प्रसाद खिलाया जाता है। इसके साथ उन्हें गिफ्ट्स भी दिए जाते हैं।