Meerut Saurav Cause: मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद अब मथुरा जेल का नाम भी चर्चा में आ गया है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में महिलाओं को फांसी देने के लिए विशेष व्यवस्था मथुरा जिला जेल में मौजूद है। यही वजह है कि अगर मुस्कान की मृत्युदंड की सजा पर कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमल किया जाता है, तो उसे मेरठ के बजाय मथुरा जेल ले जाया जा सकता है। हालांकि, अभी उसकी फांसी की तारीख तय नहीं हुई है और सजा पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
मथुरा जिला जेल में महिला कैदियों को फांसी देने के लिए विशेष फांसीघर बनाया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इसका निर्माण वर्ष 1870 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ था। उत्तर प्रदेश में महिला कैदियों को फांसी देने की व्यवस्था के लिहाज से यह जेल खास मानी जाती है। यहां फांसीघर के लिए अलग परिसर बनाया गया है। इसी ऐतिहासिक व्यवस्था के कारण मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड पाने वाली मुस्कान को लेकर मथुरा जेल की चर्चा तेज हो गई है।
आजादी के बाद किसी महिला को नहीं दी गई फांसी
मथुरा जेल का महिला फांसीघर लंबे समय से मौजूद है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आजादी के बाद यहां किसी महिला कैदी को फांसी नहीं दी गई है। इससे पहले शबनम और रामश्री जैसे मामलों में भी महिला कैदियों को मृत्युदंड दिए जाने की चर्चा के दौरान मथुरा जेल सुर्खियों में आई थी। रामश्री की सजा बाद में राष्ट्रपति की ओर से दया याचिका स्वीकार किए जाने के बाद उम्रकैद में बदल दी गई थी। ऐसे में मुस्कान का मामला एक बार फिर इस ऐतिहासिक फांसीघर को चर्चा में ले आया है।
फांसी से पहले पूरी करनी होगी कानूनी प्रक्रिया
मुस्कान और साहिल को मिली फांसी की सजा पर तत्काल अमल नहीं किया जा सकता। मृत्युदंड के मामले में हाईकोर्ट से सजा की पुष्टि जरूरी होती है। इसके बाद दोषियों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील और निर्धारित परिस्थितियों में दया याचिका दाखिल करने जैसे कानूनी विकल्प भी होते हैं। जब तक सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक फांसी को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। इसलिए फिलहाल मथुरा जेल में मुस्कान को फांसी दिए जाने की संभावना चर्चा का विषय है, न कि कोई तय कार्यक्रम।
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