
नई दिल्ली: हर साल भारत में रक्षाबंधन के त्यौहार को बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार भाई और बहन के अटूट प्यार को दर्शाता है। भले ही पूरे साल भाई-बहन एक दूजे से कितना भी झगड़ा करे और कितना भी परेशान करें, लेकिन रक्षाबंधन एक ऐसा खास हैं जहां भाई अपनी प्यारी बहना को सिर्फ ढेर सारे तोहफे ही नहीं देता, बल्कि ये वचन भी देता है कि वह जिंदगी भर उसकी रक्षा करेगा। वहीं देश मे कई ऐसे भाई और बहन होते है जो किसी ना किसी कारण से एक दूसरे के साथ नही रहते है,तो ऐसे में हम आपके लिए कुछ ऐसे प्यार भरे मैसेज लेकर आए है जिन्हें भेजकर आप अपने भाई और बहन के इस दूरी को मिनटों में दूर कर सकते है।
पहला मैसेज
कच्चे धागों से बनी पक्की डोर है राखी,
प्यार और मीठी शरारतों की होड़ है राखी,
भाई की लंबी उम्र की दुआ है राखी,
बहन के प्यार का पवित्र धुआं है राखी।
रक्षाबंधन की शुभकामनाएं
दूसरा मैसेज
राखी का त्योहार आया
खुशियों की बहार लाया
आज ये दुआ करते है हम
भैया खुश रहो तुम हरदम
रक्षाबंधन की शुभकामनाएं
तीसरा मैसेज
लड़ना-झगड़ना है इस रिश्ते की शान
रूठ कर मनवाना ही तो है इस रिश्ते का मान
भाई-बहनों में बसती है एक दूजे की जान
करता है भाई, पूरे बहनों के अरमान
रक्षाबंधन की शुभकामनाएं
चौथा मैसेज
ये लम्हा कुछ खास है,
बहन के हाथों में भाई का हाथ है,
ओ बहना तेरे लिए मेरे पास कुछ खास है,
तेरे सुकून की खातिर मेरी बहना,
तेरा भाई हमेशा तेरे साथ है।
रक्षाबंधन की शुभकामनाएं
रक्षाबंधन का इतिहास
रक्षाबंधन से जुड़ा एक इतिहास दिल को छू जाने वाला है। दरअसल, राजपूत जब युद्ध करने जाया करते थे उस समय राजघराने की महिलाएं उनके माथे पर तिलक के साथ-साथ कलाई में रेशम का धागा बांधा करती थी। जिससे यह विश्वास रहता था कि राजा युद्ध में विजयी होकर बिल्कुल सही सलामत वापस आ जाएंगे।वहीं रक्षाबंधन से जुड़ी एक और कथा बेहद प्रसिद्ध है जिसमें एक बार बहादुरशाह ने मेवाड़ पर आक्रमण कर दिया था और रानी यह बात बहुत अच्छे तरह से जानती थी कि वह अकेले युद्ध करके नहीं जीत सकती है। जिसके बाद रानी ने अपनी प्रजा को बचाने के लिए मुगल बादशाह हुमायूं को एक पत्र और राखी भेज कर रक्षा की याचना की। हुमांयू एक मुसलमान था फिर भी उसने रानी कर्मावती की भेजी हुयी राखी की लाज रखी और बहादुरशाह से लड़ते हुए मेवाड़ की रक्षा की।
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