
नई दिल्ली: आजादी से पूर्व 20वी शताब्दी के शुरुआती दशकों में भारतीय राजनीति को दो ऐसे राजनेता और विचारक मिले. जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर ही नहीं बल्की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी. वो दो नाम थे महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर. आजरबीन्द्रनाथ टैगोर का 160वां जन्मदिवस मनाया जा रहा है.साहित्य जगत के साथ ही देश की आजादी के आंदोलन में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले टैगोर ने अपने आधुनिक विचारों, कविताओं और राष्ट्रवाद पर विचारों के जरिए एक नई सोच जगाई.
कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, निबंधकार, नाटककार और चित्रकार सभी रहे रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म कोलकाता के धनी परिवार में हुआ था.उनके पिता देवेंद्रनाथ टैगोर एक जाने-माने समाज-सुधारक थे. वे अपने माता-पिता की तेरहवीं संतान थे. बचपन में उन्हें प्यार से 'रबी' बुलाया जाता था. रवींद्रनाथ टैगोर को गुरूदेव के नाम से भी जाना जाता है. यह उपाधि उन्हें गांधी जी ने दी थी उन्होंने अपनी पहली कविता आठ वर्ष की उम्र लिखी थी औरसोलह साल की उम्र में उन्होंने कहानियां और नाटक लिखना प्रारंभ कर दिया था.
अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने एक हजार कविताएं, आठ उपन्यास, आठ कहानी संग्रह और विभिन्न विषयों पर अनेक लेख लिखे है.रबीन्द्रनाथ टैगोर को साल 1913 में उनकी कृति गीतांजली के लिए साहित्य श्रेणी में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था. वह भारत के साथ ही एशिया महाद्वीप में पहले नोबेल पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति हैं. इतना ही नहीं रवींद्रनाथ टैगोर संगीत प्रेमी थे और उन्होंने अपने जीवन में 2000से अधिक गीतों की रचना की. उनके लिखे दो गीत 'जन-गन-मन'भारत का राष्ट्रगान और 'आमार सोनार बांग्ला'बांग्लादेश का राष्ट्रगान हैं.
रबीन्द्रनाथ टैगोर को 'नाइटहुड' की उपाधि भी मिली हुई थी. पर उन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) के बाद उसे लौटा दिया था. 1921 में कलकत्ता में उन्होंने 'शांति निकेतन' की नींव रखी जिसे आज 'विश्व भारती' यूनिवर्सिटी के नाम से भी जाना जाता है.टैगोर न सिर्फ एक महान रचनाधर्मी थे बल्कि वो पहले ऐसे व्यक्ति भी थे जिन्होंने पूर्वी और पश्चिमी देशों के बीच एक सेतु का काम किया.
गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर केवल भारत में ही नही बल्कि पूरे विश्व के साहित्य, कला और संगीत के एक महान प्रकाश स्तंभ है. बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे. देशभक्ति का संचार करने वाली और एक नई राह देने वाली उनकी रचनाएँ सदैव हमें प्रेरित करती रहेंगी.
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