एमसीडी कमिश्नर और मेयर के बीच पावर की जंग, स्टैंडिंग कमेटी चुनावी तारीख को लेकर भिड़ंत

एमसीडी कमिश्नर और मेयर के बीच पावर की जंग, स्टैंडिंग कमेटी चुनावी तारीख को लेकर भिड़ंत

MCD Standing Committe Election: दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव 26 सितंबर होना था। हालांकि अब चुनाव टल गया है।अब एमसीडी कमिश्नर अश्विनी कुमार ने 27 सितंबर को दोपहर 1 बजे स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव कराने का आदेश दे दिया है। एडिशनल कमिश्नर जितेंद्र यादव पीठासीन अधिकारी बताए गए हैं।

एमसीडी कमिश्नर के मुताबिक मेयर ने कहा कि स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव 5 अक्टूबर को होगा। उससे पहले आयोजित होता है तो असंवैधानिक होगा। हालांकि डिप्टी मेयर ने मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लिहाजा मामले को उपराज्यपाल वीके सक्सेना के पास भेजा गया। जिसके उपराज्यपाल ने 27 सितंबर को चुनाव कराने का आदेश दिया। साथ ही उन्होंने यहा एडिश्नल कमिश्नर जितेंद्र यादव रिटर्निग अधिकारी होंगे।

स्टैंडिंग कमेटी चुनाव में क्या हुआ    

दरअसल 18 सदस्यों वाली एमसीडी की कमेटी ताकतवर है। अभी तक 17 सदस्यों का चुनाव हो चुका है। जिनमें नौ भाजपा के तो 8 आदमी पार्टी के हैं। इसलिए स्टैंडिंग कमेटी में दबदबा किसका होगा मामला इस पर टीका हुआ है। ऐसा माना जाता है कि जब वार्ड कमेटी के चुनाव हो रहे थे तो कुछ पार्षदों ने अपनी पार्टियों को सबूत के तौर पर फोन से खींचे गए फोटो भेजे। हालांकि ऐसा करने से कमिश्नर और निगम सचिव ने मना कर दिया गया। यहीं पर बात अधिकारों की आ गई और बखेड़ा खड़ा हो गया।     

केंद्र सरकार का अहम रोल              

दिल्ली का स्थानीय निकाय होने के बावजूद एमसीडी कमिश्नर की नियुक्ति का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। इसलिए ऐसा क्योंकि कमिश्नर दिल्ली सरकार की बात तो अनदेखा कर सकते हैं मगर केंद्र की बात को नहीं। अब जबकि केंद्र में और दिल्ली दोनों जगह अलग-अलग पार्टियों की सत्ता है। उन्हीं दोनों पार्टियों के बीच  सत्ता का संग्राम एमसीडी के लिए चल रहा है। तो ऐसे में आम आदमी पार्टी की मेयर अपने अधिकारों में काट छांट को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं।  उन्हें डर है कि अगर अधिकारियों ने एक जगह अपनी मनमानी चला ली तो फिर बार-बार ब्यूरोक्रेसी पॉलिटिकल विंग पर हावी होता रहेगा। 

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