
Uniform Civil Code: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से बड़ा इशारा किया है। उन्होंने 78वें स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देते हुए कहा कि देश में अब एक सेकुलर सिविल कोड होना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। पीएम के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही एक देश एक कानून लागू करने जा रही है। हालांकि, समान नागरिक संहिता उत्तराखंड और गोवा जैसे राज्यों ने पहले ही लागू कर रखा है। बता दें, भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में भी समान नागरिक संहिता को लंबे समय से शामिल कर रखा है।
क्या कहा पीएम मोदी ने?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन ने कहा 'नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों को पूरा करना भारत के 140 करोड़ लोगों का कर्तव्य है और मैं इस पर बहस चाहता हूं। जो कानून सांप्रदायिक और भेदभावपूर्ण हैं उनका कोई स्थान नहीं है, हमें एक धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता की आवश्यकता है।'
क्या होता है समान नागरिक संहिता?
समान नागरिक संहिता का अर्थ है कि देश में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना। यानी अगर किसी भी राज्य में यह कोड लागू होता है तो विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे तमाम विषयों में हर व्यक्ति के लिए एक कानून का पालन करना होगा। हालांकि, अभी हिंदुओं के लिए अलग कानून बना हुआ है, तो वहीं मुस्लिम धर्म अपनी धार्मिक कानून का पालन करते हैं। ऐसे ही अन्य धर्म के लोग अपनी मान्यता के हिसाब से विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे तमाम विषयों पर खुद से फैसला ले सकता हैं। संविधान के 44वें अनुच्छेद में कहा गया है कि सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करना सरकार का दायित्व है।
गौरतलब है कि गोवा और उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू है। वहीं, कई अन्य राज्य इस कानून को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
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