Piyush Goyal Lashesh Out On Congress: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्ष के विरोध के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है। 13 अक्टूबर 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोयल ने कांग्रेस के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के उसके रुख को लेकर सवाल किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों को राजनीतिक पद और सम्मान दिए गए। गोयल ने राहुल गांधी के बयानों को लेकर कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया।
पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्हें पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने का मौका दिया था। शेषन ने गांधीनगर सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। गोयल ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस शेषन की निष्पक्षता और ईमानदारी की प्रशंसा करती थी, तो उन्हें पार्टी का उम्मीदवार बनाना क्या राजनीतिक लाभ देने जैसा नहीं था? उन्होंने इस उदाहरण के जरिए चुनाव आयोग के अधिकारियों की नियुक्ति और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले राजनीतिक पदों को लेकर कांग्रेस के रवैये पर सवाल खड़े किए।
एमएस गिल को पद्म विभूषण और बाद में कैबिनेट में जगह देने का मुद्दा
गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का भी जिक्र किया, जो 1996 से 2001 तक इस पद पर रहे। उन्होंने कहा कि गिल को वर्ष 2000 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया और बाद में वह कांग्रेस से जुड़े। वर्ष 2004 में वह राज्यसभा पहुंचे और 2008 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए गए। गोयल ने सवाल किया कि क्या इस तरह सम्मान और राजनीतिक पद देना चुनाव आयोग के अधिकारियों को पुरस्कृत करने जैसा नहीं था? हालांकि, पद्म विभूषण को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि गिल को यह सम्मान वर्ष 2000 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौरान मिला था। इसलिए इस सम्मान को कांग्रेस सरकार द्वारा दिए गए पुरस्कार के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा का पलटवार, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बहस तेज
पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करने की आजादी दी है और अधिकारियों को राजनीतिक लाभ पहुंचाने की कोशिश नहीं की। दूसरी ओर, राहुल गांधी और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका तथा चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इस विवाद के बीच चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। दोनों पक्षों के आरोपों और दावों का आकलन संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक बयानों और तथ्यों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
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