Rahul Gandhi Meeting: सुप्रीम कोर्ट तक इंडिया ब्लॉक के 'चलो दिल्ली' मार्च के बाद, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने आज 13 अक्टूबर 2026 मंगलवार को कहा कि 'लोकतंत्र की रक्षा' का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने नागरिक समाज, छात्र संगठनों और इंडिया ब्लॉक के नेताओं के साथ-साथ विपक्षी सांसदों को आज चाय पर आमंत्रित किया है, जिसके बाद वे मीडिया के सामने अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की "रक्षा" के लिए सभी एक साथ हैं।
राहुल गांधी की चाय वाली मीटिंग
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा 'आज मैंने इंडिया गठबंधन के नेताओं, विपक्षी सांसदों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के साथियों को अपने घर पर चाय पर आमंत्रित किया है। लोकतंत्र की रक्षा के इस जन आंदोलन में हम सभी एक साथ हैं - और यह आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।' उन्होंने आगे कहा 'चाय के बाद, हम सभी एक साथ आएंगे और मीडिया के सामने अपना पक्ष रखेंगे। सभी विरोध प्रदर्शन एक हैं।'
इंडिया ब्लॉक का सुप्रीम कोर्ट मार्च
बता दें, यह घटनाक्रम राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के नेताओं और समर्थकों द्वारा बाराखंबा रोड से होते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने के बाद सामने आया है। इसके बाद सोमवार को 11 विपक्षी नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती दी। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे और इंडिया ब्लॉक के नौ अन्य नेताओं द्वारा दायर याचिका में 14 खामियों को चिह्नित किया है।
मालूम हो कि इस याचिका में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के पहलुओं को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत, CPI(M) सांसद एमए बेबी, CPI नेता डी राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा सांसद महुआ मांझी, NCP (SSP) सांसद सुप्रिया सुले और भारतीय संघ मुस्लिम लीग सांसद ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं।
गौरतलब है कि रजिस्ट्री ने याचिकाकर्ताओं से यह स्पष्टीकरण भी मांगा है कि निजी पक्षकारों - मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी को याचिका में प्रतिवादी क्यों बनाया गया है। यह आपत्ति संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका के संदर्भ में उठाई गई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि वे SIR के दौरान चुनाव आयोग की शक्तियों के प्रयोग में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहे हैं और अन्य राहतों के साथ-साथ मतदाता सूची संशोधन से संबंधित निर्णयों को लेने और लागू करने के तरीके की जांच की मांग की है।
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