
MCD Bulldozer Action: दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण हटाने के दौरान MCD और पुलिस की कार्रवाई ने हंगामा मचा दिया। मंगलवार, 6 जनवरी आधी रात MCD ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद अवैध निर्माण ढहा दिया। इस दौरान पुलिस पर भी पथराव हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। इस बुलडोजर एक्शन पर अब AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस कार्रवाई को गलत ठहराया और कहा कि इसमें दिल्ली वक्फ बोर्ड की मिलीभगत है। ओवैसी ने बताया कि यह जमीन पूरी तरह से वक्फ की है, और 1970 की गजट अधिसूचना में इसका जिक्र है।
ओवैसी ने उठाया ये सवाल
ओवैसी ने कहा कि 12 नवंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया था। उन्होंने सवाल उठाया कि अदालत ने ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ नामक याचिकाकर्ता के आधार पर सर्वेक्षण का आदेश दिया, लेकिन वक्फ बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाया गया। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण में MCD, रेवेन्यू और पुलिस के अधिकारी शामिल थे, लेकिन वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल नहीं थे।
पुनर्विचार याचिका की दी सलाह
उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली वक्फ बोर्ड को अदालत में पुनर्विचार याचिका डालनी चाहिए थी और सर्वेक्षण में अपना पक्ष रखा जाना चाहिए था। ओवैसी ने यह भी बताया कि यह भूमि 1947 से मस्जिद का स्थान रही है और अब इसे नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 और संसद के कानून की भी अवहेलना हुई।
AIMIM प्रमुख ने लगाया आरोप
ओवैसी ने दिल्ली वक्फ बोर्ड पर आरोप लगाते हुए कहा कि बोर्ड पूरी तरह से इसमें शामिल है और यह उनकी नादानी नहीं बल्कि जानबूझकर की गई मिलीभगत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में जाकर यथास्थिति बहाल कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा। असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण बताया और कहा कि अदालत को पूरी जानकारी देने की जरूरत है ताकि मस्जिद की असली संपत्ति और अधिकार सुरक्षित रह सकें।
Leave a comment