बीजेपी के 75 पार पर, कांग्रेस का परिवर्तन वार !

बीजेपी के 75 पार पर, कांग्रेस का परिवर्तन वार !

हरियाणा की सियासत हर रोज़ अपना रुख बदल रही है,बीजेपी का मनोहर काफिला भले ही एक लय में आगे बढ़ रहा हो, लेकिन विपक्षी दल खुद को जनता के बीच ले जाने और अपनी साख को मजबूत करने के लिए रोज़ नई नई तिकड़म लगा रहे हैं।

इसी बीच कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव कर दिया है। पार्टी में चल रही आंतरिक खींचतान को खत्म करने के लिए कांग्रेस ने बड़े आमूल चूल परिवर्तन किए हैं। इस सबके बीचमहागठबंधन का नया शिगूफा भी सामने आ रहा है। अब तक खापें इनेलो और जजपा के बीच की दूरियों को कम करने क लिए मध्यस्थ के तौर पर सामने आई थी, लेकिन अब खबर है कि खापों ने इनेलो, जजपा और हुड्डा को एक साथ चुनाव लड़वाने की मुहिम तेज कर दी है।

हरियाणा चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है, हरियाणा कांग्रेस में चल रही गुटबाज़ी और चूहे बिल्ली के खेल को खत्म करने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने कुमारी शैलजा को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया है। वहीं हुड्डा को कांग्रेस विधायक दल का नेता और चुनाव समिति का चेयरमैन बनाया गया है,  हालांकि पार्टी अध्यक्ष बनने के उनके मंसूबों पर पानी जरूर फेर दिया ये चुनाव कई मायनों में एतिहासिक होने वाला है, क्योंकि इससे पहले जो कभी नहीं हुआ, हो सकता है वो इस चुनाव में आपको देखने को मिल जाए कल तो जो दल और नेता एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते थे, एक दूसरे की सरकारों को लेकर सवाल उठाते थे, वही दल और नेता हो सकता है आपको कल एक मंच पर देखने को मिल जाएं।

क्योंकि इनेलो, जजपा और हुड्डा को एक साथ चुनाव लड़वाने की कवायद खापों ने शुरू कर दी है। हालांकि खाप प्रतिनिधी अभी चौटाला परिवार के ही संपर्क में हैं, और इनेलो जजपा को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी के साथ एक और कोशिश खाप नेताओं ने शुरू कर दी है खाप नेता रमेश दलाल की मानें तो महागठबंधन की रूपरेखा में कांग्रेस, बसपा समेत अन्य विपक्षी दलों को शामिल करने को लेकर वो लगातार संपर्क में हैं, और चौटाला परिवार के दोनों दलों के एकजुट होने के बाद दूसरे दलों को भी इस मुहीम में जोड़कर महागठबंधन बनाया

बीजेपी का लक्ष्य 75 प्लस है, और सीएम मनोहर लाल अपने इसी लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों की बिखरी हुई ताकत को एकजुट करने के लिए महागठबंधन का फलसफा गढ़ा जा रहा है, लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या ये फलसफा अपने अंजाम तक पहुंचेगा। क्योंकि  लोकसभा चुनाव में भी विपक्षी दलों को एकजुट कर महागठबंधन की कवायद हुई थी। और उसका नतीजा क्या निकला ये आप सभी जानते है।

 

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