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महिला आरक्षण बिल पर गरमाई सियासत, किरेन रिजिजू ने विपक्ष से की खास अपील; बोले - जानबूझकर अफवाहें...

महिला आरक्षण बिल पर गरमाई सियासत, किरेन रिजिजू ने विपक्ष से की खास अपील; बोले - जानबूझकर अफवाहें...

Kiren Rijiju on Women Reservation Bill: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर विपक्षी दलों से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि इस बिल पर कोई राजनीतिक विरोध नहीं है, फिर भी कुछ लोग जानबूझकर गलतफहमियां और अफवाहें फैला रहे हैं। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारतीय राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा और बिल पूरी तरह संतुलित है। 

किरेन रिजिजू ने क्या कहा?

आज संसद के विशेष सत्र के बीच रिजिजू ने विपक्ष से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को राजनीति का शिकार न बनाएं। उन्होंने कहा 'यह बिल किसी एक पार्टी या सरकार का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। सभी दल सैद्धांतिक रूप से इसके पक्ष में हैं। कुछ बयान सिर्फ राजनीतिक मकसद से दिए जा रहे हैं, लेकिन हमें महिलाओं के सशक्तिकरण के इस ऐतिहासिक कदम को राजनीति से ऊपर रखना चाहिए।'

बता दें. रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर भी सहयोग मांगा था। उन्होंने खरगे से अनुरोध किया कि बिल के क्रियान्वयन में देरी न हो, ताकि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले यह लागू हो सके। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर जो गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह बेबुनियाद हैं। दक्षिण के राज्यों को सीटें कम होने की बात गलत है, क्योंकि कुल लोकसभा सीटों में वृद्धि का प्रावधान है और हर क्षेत्र का निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।

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सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि 40 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद अब और देरी उचित नहीं। रिजिजू ने सभी दलों से अपील की कि वे इस बिल को एकमत से पास करें, ताकि देश की महिलाओं को उनके हक का लाभ मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुछ लोग दक्षिणी राज्यों में जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि बिल सभी क्षेत्रों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

विपक्ष ने क्या कहा?

विपक्ष की ओर से परिसीमन और जनगणना को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं, लेकिन रिजिजू ने इनका जवाब देते हुए कहा कि बिल में ऐसा कुछ भी विवादास्पद नहीं है जो किसी राज्य या क्षेत्र के लिए हानिकारक हो। उन्होंने सभी पार्टियों से संसद में रचनात्मक बहस करने और महिलाओं के भविष्य को मजबूत बनाने का आह्वान किया।

मालूम हो कि यह बिल 2023 में संसद द्वारा पारित हो चुका है, लेकिन इसके पूर्ण क्रियान्वयन के लिए संवैधानिक संशोधन और परिसीमन की जरूरत है। सरकार इसे 2029 के चुनावों से पहले लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। रिजिजू के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि विशेष सत्र में बिल पर सहमति बन सकती है।

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