'मतभेद हैं...लेकिन मनभेद नहीं', BJP और संघ के रिश्तों पर बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत; जनसंख्या संतुलन पर कही ये बात

'मतभेद हैं...लेकिन मनभेद नहीं', BJP और संघ के रिश्तों पर बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत; जनसंख्या संतुलन पर कही ये बात

RSS Chief  Mohan Bhagwat Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा और संघ के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा 'बीजेपी और संघ में मतभेद हो सकते हैं, मनभेद कभी नहीं।' उनका कहना है कि केंद्र और राज्य की सभी सरकारों के साथ संघ का समन्वय रहता है। इसके अलावा उन्होंने कहा 'तीन बच्चे पैदा करने चाहिए, यह देश के लिहाज से ठीक है।'

मोहन भागवत ने दिया एकता का संदेश

दरअसल, मोहन भागवत ने 28 अगस्त को दिल्ली में RSS के एक तीन दिवसीय कार्यक्रम "100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज" में यह बयान दिया। इस दौरान उनसे भाजपा और RSS के बीच कथित मतभेदों और समन्वय के बारे में सवाल पूछा गया। भागवत ने स्पष्ट किया कि दोनों संगठनों के बीच विचारों में भिन्नता हो सकती है। लेकिन यह वैचारिक असहमति (मतभेद) तक सीमित है, न कि व्यक्तिगत या भावनात्मक स्तर पर कोई टकराव (मनभेद)। उन्होंने कहा 'हमारे यहां मतभेद के विचार कुछ हो सकते हैं, लेकिन मनभेद बिल्कुल नहीं है। एक-दूसरे पर विश्वास है।'

उन्होंने यह भी खारिज किया कि RSS सरकार या भाजपा के हर निर्णय को नियंत्रित करता है। भागवत ने कहा 'क्या RSS सब कुछ तय करता है? यह पूरी तरह गलत बात है। मैं कई सालों से संघ चला रहा हूं, और वे (भाजपा) सरकार चला रहे हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों संगठन अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से काम करते हैं, लेकिन उनका लक्ष्य एक ही है—देश का कल्याण हो।

भारत की जनसंख्या नीति पर बोले मोहन भागवत

इसके अलावा मोहन भागवत ने अपने बयान में भारत की जनसंख्या नीति का हवाला देते हुए कहा कि 1998-2002 में बनी नीति के अनुसार, देश की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate - TFR) 2.1 से नीचे नहीं जानी चाहिए। TFR वह औसत संख्या है, जो एक महिला अपने प्रजनन काल में बच्चों को जन्म देती है। जनसंख्या विज्ञान के अनुसार, 2.1 की दर एक समाज को स्थिर रखने के लिए आवश्यक है। क्योंकि यह माता-पिता की जगह लेने वाली अगली पीढ़ी को सुनिश्चित करती है।

भागवत ने कहा '2.1 का मतलब है कि प्रत्येक परिवार में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए, क्योंकि अंश में बच्चे पैदा नहीं हो सकते।' उन्होंने चेतावनी दी कि यदि TFR 2.1 से नीचे जाती है, तो समाज धीरे-धीरे लुप्त होने की कगार पर पहुंच सकता है, जैसा कि कई देशों में देखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि तीन बच्चों की नीति न केवल जनसंख्या संतुलन के लिए जरूरी है, बल्कि यह माता-पिता और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।  

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