79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन, एकता और प्रगति के आह्वान का दिया संदेश

79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन, एकता और प्रगति के आह्वान का दिया संदेश

Independence Day 2025: 14अगस्त, 2025को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को संबोधित किया। यह उनका इस पद पर चौथा स्वतंत्रता दिवस संबोधन था, जो देश के लिए गौरव और एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा 'मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को मैं हार्दिक बधाई देती हूं। हम सभी के लिए यह गर्व की बात है कि स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस सभी भारतीय उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं। ये दिवस हमें भारतीय होने के गौरव का विशेष स्मरण कराते हैं।'

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन

79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में भारत के लोकतंत्र और संविधान की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोकतांत्रिक मूल्यों को न केवल अपनाया, बल्कि उन्हें और सशक्त किया है। उन्होंने संविधान को देश की आधारशिला बताते हुए कहा  'हमारा संविधान और लोकतंत्र हमारे लिए सर्वोपरि है। इसने हमें ऐसी संस्थाओं का निर्माण करने में सक्षम बनाया, जो लोकतांत्रिक कार्यशैली को मजबूती प्रदान करती हैं।'

राष्ट्रपति मुर्मू ने बदले भारत पर क्या कहा?

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा 'अपनी स्वाधीनता को पुन: प्राप्त करने के बाद हम एक ऐसे लोकतंत्र के मार्ग पर आगे बढ़ें जिसमें सभी व्यस्कों को मतदाना का अधिकार था। दूसरे शब्दों में कहें तो हम भारत के लोगों ने अपनी नियति को स्वरूप देने का अधिकार स्वयं को अर्पित किया। अनेक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में लिंग, धर्म तथा अन्य आधारों पर लोगों के मताधिकार पर पाबंदियां होती थीं। परंतु हमने ऐसा नहीं किया।'

उन्होंने आगे कहा चुनौतियों के बावजूद भारत के लोगों ने लोकतंत्र को सफलतापूर्वक अपनाया। लोकतंत्र को अपनाना हमारे प्राचीन लोकतामंत्रिक मूल्यों की सहज अभिव्यक्ति थी। भारत भूमि विश्व के प्राचीनतम गणराज्यों की धरती रही है। इसे लोकतंत्र की जननी कहना सर्वथा उचित है। हमारे द्वारा अपनाए गए संविधान की आधारशिला पर हमारे लोकतंत्र का भवन निर्मित हुआ है। हमने लोकतंत्र पर आधआरित ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया जिनसे लोकतांत्रिक कार्यशैली को मजबूती मिली।'

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