Bansuri Swaraj Statement: लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर लोकसभा में हुई तीखी बहस के दौरान भाजपा सांसद बंसुरी स्वराज ने मंगलवार को विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष पर परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में चुनिंदा आक्रोश का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी न तो नई है और न ही किसी एक सरकार तक सीमित है।
केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस साल NEET-UG 2026 विवाद के मद्देनजर 27 जुलाई को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा में पेश किया। उन्होंने कहा ‘इससे पहले कि विपक्ष मुझ पर 'क्या-क्या' का आरोप लगाए, यह 'क्या-क्या' का मुद्दा नहीं है, बल्कि मैं विपक्ष के चुनिंदा आक्रोश पर सवाल उठा रही हूं। अगर यह लड़ाई सिद्धांतों की है, तो सरकार को देखकर सिद्धांत कैसे बदल सकते हैं?’
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लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर बंसुरी स्वराज ने क्या कहा?
बंसुरी स्वराज ने इस संशोधन को केंद्र सरकार के दृष्टिकोण और इस मुद्दे के प्रति इरादे का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा ‘यह एक क्रांतिकारी संशोधन है। यह न केवल आवश्यक है बल्कि समय की मांग भी है। इस संशोधन को लाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी और जिम्मेदार सरकार का प्रमाण है। प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना कि पेपर लीक एक गंभीर पाप है, केवल एक बयान नहीं बल्कि उनकी सरकार का उद्देश्य है, इसीलिए आज यह संशोधन यहां लाया गया है।‘
भाजपा सांसद ने आगे कहा कि कानून को अपने सामने आने वाली चुनौतियों के साथ विकसित होना चाहिए और एक समझौतावादी परीक्षा “भारत के सबसे मेहनती बच्चों को जोड़ने वाले पवित्र समझौते” को कमजोर करती है। उन्होंने कहा ‘कानून एक जीवंत साधन है। इसे अपने सामने आने वाली चुनौतियों के साथ विकसित होना चाहिए और हमारे जैसे जटिल और विशाल लोकतंत्र में, परीक्षा सबसे सच्ची और योग्यता-आधारित प्रक्रिया है, जहां एक ही घड़ी के नीचे, एक मजदूर का बेटा और एक सीईओ की बेटी एक ही तरह के सवालों के जवाब देते हैं और एक ही मापदंड पर परखे जाते हैं। जब ऐसी परीक्षा में समझौता होता है, तो भारत के सबसे मेहनती बच्चों को जोड़ने वाला पवित्र समझौता कमजोर हो जाता है। एक मौन वादा कि भारत में केवल मेहनत और योग्यता ही जीतेगी।‘
संसद में क्या बोली बंसुरी स्वराज?
स्वराज ने कहा कि संगठित "परीक्षा माफिया" अब राज्यों की सीमाओं के पार काम कर रहा है, और यह संशोधन क्षेत्राधिकार संबंधी कमियों को दूर करने के लिए बनाया गया है। विधेयक के प्रावधान पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा ‘आज एक शिक्षा माफिया स्थापित हो चुका है। यह विधेयक क्षेत्राधिकार संबंधी भ्रम को दूर करने में सहायक है क्योंकि इसमें केंद्र सरकार द्वारा जांच के लिए एक विशेष कार्यबल गठित करने का प्रावधान है। इसमें प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक विशेष त्वरित न्यायालय गठित करने का भी प्रावधान है। इतना ही नहीं, यह विधेयक जांच एजेंसियों को केवल दो महीनों में जांच पूरी करने का निर्देश देता है, और त्वरित न्यायालय को तीन महीनों में फैसला सुनाना होगा।‘
उन्होंने आगे कहा ‘यदि किसी आरोपी को लगता है कि अपील से समय बढ़ जाएगा, तो यह संशोधन इसे भी समाप्त कर देता है। इसमें कहा गया है कि अपील सीधे उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष जाएगी।‘उन्होंने कहा पिछले 12 वर्षों में, मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या दोगुनी हो गई है। IIT की संख्या 16 से बढ़कर 23 और IIM की संख्या 13 से बढ़कर 21 हो गई है। कार्यरत AIIMS की संख्या 7 से बढ़कर 20 हो गई है। विश्वविद्यालयों की संख्या में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।‘