'NASA को पीछे छोड़ दुनिया में छाएगा ISRO', लखनऊ में बोले शुभांशु शुक्ला

'NASA को पीछे छोड़ दुनिया में छाएगा ISRO', लखनऊ में बोले शुभांशु शुक्ला

Shubhanshu Shukla: उत्तर प्रदेश के गौरव और भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंचने वाले अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टेट गेस्ट का दर्जा प्रदान किया है। इस दौरान शुभांशु शुक्ला ने गर्व के साथ कहा 'लोग अब NASA नहीं, ISRO की बात करेंगे।' बता दें, आज सोमवार शुभांशु शुक्ला को अपने गृहनगर लखनऊ पहुंचे। जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। 

ISRO की उपलब्धियों पर क्या बोले शुभांशु शुक्ला?

शुभांशु शुक्ला ने अपने संबोधन में ISRO के उन मिशनों पर जोर दिया, जिन्होंने विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। चंद्रयान मिशन, मंगलयान और आदित्य-L1सौर मिशन जैसे प्रोजेक्ट्स ने ISRO को वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान में अग्रणी बनाया है। विशेष रूप से चंद्रयान-3की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग ने न केवल भारत का झंडा बुलंद किया, बल्कि इसे ऐसा करने वाला पहला देश बनाया। इस दौरान शुभांशु ने कहा 'हमारे वैज्ञानिकों ने कम संसाधनों में असाधारण परिणाम दिए हैं, और यह भारत की ताकत है।' 

ISRO और NASA की तुलना

शुभांशु ने NASA और ISRO की तुलना पर बात करते हुए कहा कि जहां NASA के पास विशाल बजट और संसाधन हैं। वहीं ISRO ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद विश्वस्तरीय उपलब्धियां हासिल की हैं। मंगलयान जैसे मिशन ने दिखाया कि भारत कम खर्च में भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा 'हमारा ध्यान तकनीकी नवाचार और आत्मनिर्भरता पर है और यही कारण है कि विश्व अब ISRO की ओर देख रहा है।'

शुभांशु शुक्ला का ऐतिहासिक मिशन

मालूम हो कि शुभांशु शुक्ला ने एक्सियॉम-4मिशन के तहत 25जून को नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी थी और 26जून को ISS पहुंचे। इस मिशन में उन्होंने 18दिनों तक विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें भारत के लिए सात विशेष माइक्रोग्रैविटी प्रयोग शामिल थे। ये प्रयोग भारत के गगनयान मिशन और स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इसके बाद 15 जुलाई को उनकी सुरक्षित वापसी कैलिफोर्निया तट पर प्रशांत महासागर में स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान के स्प्लैशडाउन के साथ हुई। जिसके बाद वह 17 अगस्त को भारत लौटे। बता दें, गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसके तहत 2026 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।

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