अब हरियाणा बनेगा थोक बाजार का नया हब, दिल्ली सरकार ला रही शिफ्टिंग रोकने की नई पॉलिसी

अब हरियाणा बनेगा थोक बाजार का नया हब, दिल्ली सरकार ला रही शिफ्टिंग रोकने की नई पॉलिसी

Haryana Wholesale Market: दिल्ली के प्रमुख थोक बाजारों को हरियाणा में स्थानांतरित करने की योजनाओं ने दिल्ली सरकार को चिंतित कर दिया है। हरियाणा सरकार इन बाजारों को आकर्षित करने के लिए कई कोशिशें कर रही है, जिससे दिल्ली के व्यापार और राजस्व पर असर पड़ सकता है। इसके जवाब में दिल्ली सरकार एक नई व्यापार नीति तैयार कर रही है, जो थोक व्यापार को दिल्ली में बनाए रखने और गोदामों को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगी। यह कदम दिल्ली के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए उठाया जा रहा है।

हरियाणा की योजना क्या है?

हरियाणा सरकार दिल्ली के प्रसिद्ध थोक बाजारों जैसे खारी बावली (मसाले), चावड़ी बाजार (कागज और स्टेशनरी), भागीरथ पैलेस (इलेक्ट्रिकल सामान) और कीर्ति नगर (फर्नीचर) को सोनीपत के राई में स्थानांतरित करने की कोशिश कर रही है। इसका उद्देश्य हरियाणा की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है, जहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिल्ली के व्यापारिक संगठनों से मुलाकात कर जमीन आवंटन और विस्तार की सुविधाएं देने की सहमति दी थी। राई क्षेत्र में नई मार्केट विकसित करने की योजना है, जो दिल्ली से सटे होने के कारण आकर्षक है। इससे हरियाणा में रोजगार और व्यापार बढ़ने की उम्मीद है।

दिल्ली सरकार की नई नीति

दिल्ली सरकार इन प्रयासों से सतर्क हो गई है और थोक बाजारों को बाहर जाने से रोकने के लिए एक नई व्यापार नीति लाने की तैयारी कर रही है। इस नीति में गोदामों के लिए विशेष प्रोत्साहन, कर छूट और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर होगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में चांदनी चौक और सदर बाजार जैसे बाजारों को भीड़भाड़ के कारण शिफ्ट करने का सुझाव दिया था, लेकिन व्यापारियों के विरोध के बाद फोकस दिल्ली में ही बनाए रखने पर है। नीति का मकसद दिल्ली के राजस्व को सुरक्षित रखना और व्यापारियों को स्थानीय सुविधाएं प्रदान करना है।

दिल्ली के व्यापारी इस शिफ्ट के खिलाफ हैं और बाजारों का रीडेवलपमेंट दिल्ली में ही चाहते हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने मुख्यमंत्री के बयान पर चिंता जताई और कहा कि शिफ्टिंग से व्यापार प्रभावित होगा। अब अगर बाजार शिफ्ट होते हैं, तो दिल्ली का राजस्व घट सकता है और हरियाणा को फायदा होगा। हालांकि, कुछ व्यापारी हरियाणा में विस्तार की संभावनाएं तलाश रहे हैं। यह मुद्दा दिल्ली-हरियाणा के बीच आर्थिक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।

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