अब ट्रैफिक की टेंशन को कहे BYE-BYE! दिल्ली-हरियाणा को जोड़ेगा 20 KM लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर

अब ट्रैफिक की टेंशन को कहे BYE-BYE! दिल्ली-हरियाणा को जोड़ेगा 20 KM लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर

Delhi-Haryana Elevated Corridor: दिल्ली और हरियाणा के बीच रोजाना लगने वाले भयानक ट्रैफिक जाम से अब जल्द ही छुटकारा मिल सकता है। दिल्ली सरकार ने मुनक नहर के साथ एक 20 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण कराने का फैसला किया है, जो उत्तर-पश्चिम दिल्ली के इंडरलोक से बवाना तक बनेगा। इस परियोजना को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपा जा रहा है, ताकि निर्माण कार्य सुचारू रूप से पूरा हो सके। अधिकारियों का कहना है कि यह कॉरिडोर न केवल ट्रैफिक को डीकॉन्गेस्ट करेगा, बल्कि यात्रा समय में भी 40 प्रतिशत तक की कमी लाएगा।

दिल्ली-हरियाणा एलिवेटेड कॉरिडोर

बता दें, यह परियोजना मुनक नहर के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करते हुए बनाई जाएगी, जो हरियाणा से दिल्ली तक पानी की आपूर्ति करती है। इसका रूट इंडरलोक से शुरू होकर बवाना तक जाएगा, जो दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर के करीब है। इससे मुकरबा चौक जैसे व्यस्त जंक्शनों पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी और यह अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) से जुड़ेगा, जो दिल्ली के बाहरी रिंग रोड नेटवर्क को मजबूत करेगा। परियोजना से 18 विधानसभा क्षेत्रों, दो संसदीय क्षेत्रों और 35 नगर निगम वार्डों के निवासियों को फायदा पहुंचेगा। 

इसके अलावा परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 4,700 करोड़ रुपये बताई जा रही है। दिल्ली सरकार इसकी फंडिंग का इंतजाम करेगी, जबकि NHAI निर्माण की जिम्मेदारी संभालेगा। दिल्ली लोक निर्माण विभाग (PWD) फंडिंग, भूमि अधिग्रहण और स्थानीय समन्वय का काम देखेगा और जल्द ही इसका टेंडर भी निकालेगा। हाल ही में हरियाणा सरकार से इन-प्रींसिपल सहमति मिल चुकी है, क्योंकि नहर का हिस्सा हरियाणा में भी है।

जाम से मिलेगा छुटकारा

वहीं, अब वर्तमान स्थिति की बात करें तो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है, जो अगले तीन महीनों में पूरी होने की उम्मीद है। डीपीआर तैयार होने के बाद काम शुरू होगा और निर्माण में तीन साल लग सकते हैं। इससे दिल्ली-हरियाणा के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। साथ ही, यह कॉरिडोर सिग्नल-फ्री होगा, जो यात्रियों को तेज और सुरक्षित सफर प्रदान करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दिल्ली के उत्तरी और पश्चिमी इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा, साथ ही पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा क्योंकि जाम से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी। दिल्ली सरकार की यह पहल शहर की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

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