
Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक बड़ा झटका लगा, जब राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख अजित पवार का एक विमान हादसे में निधन हो गया। यह हादसा बारामती हवाई पट्टी पर लैंडिंग के दौरान हुआ, जहां विमान दुर्घटनाग्रस्त होकर आग के गोले में तब्दील हो गया।
इस घटना में अजित पवार सहित विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई, जिसमें उनके सुरक्षा अधिकारी, सहायक और चालक दल के सदस्य शामिल थे। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, विमान मुंबई से बारामती की ओर जा रहा था, जहां अजित पवार को जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों से जुड़ी कई बैठकों में हिस्सा लेना था। लेकिन विमान अचानक हादसे का शिकार हो गया। हादसे की जगह पर विमान के टुकड़े बिखरे पड़े थे और धुआं दूर तक फैला हुआ था।
हादसे की जांच जारी
बताया जा रहा है कि यह विमान चार्टर्ड था, जिसकी पहचान VT-SSK-LJ45के रूप में की गई है। सुबह करीब 8:45बजे के आसपास बारामती एयरस्ट्रिप पर लैंडिंग के दौरान विमान ने संतुलन खो दिया और पास के एक खेत में गिरकर क्रैश हो गया। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने पुष्टि की कि विमान में कोई जिंदा नहीं बचा। घटना के बाद अजित पवार की चचेरी बहन सुप्रिया सुले भी मौके पर पहुंचे। कुछ रिपोर्ट्स में साजिश की आशंका भी जताई गई है, हालांकि जांच जारी है और तकनीकी खराबी को प्राथमिक कारण माना जा रहा है। महाराष्ट्र पुलिस और DGCA की टीमों ने जांच शुरू कर दी है।
अजित पवार का परिचय
अजित अनंतराव पवार का जन्म 22जुलाई 1959को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ था। वे शरद पवार के भाई अनंतराव पवार और आशाताई पवार के बेटे थे, जिससे वे शरद पवार के भतीजे बने। राजनीति उनके खून में थी, क्योंकि पवार परिवार महाराष्ट्र की राजनीति में गहराई से जुड़ा हुआ है। अजित ने देवलाली में स्कूली शिक्षा ली, लेकिन पिता के जाने के बाद कॉलेज छोड़कर परिवार का सहारा बने।
7बार बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने
अजित पवार की राजनीतिक यात्रा 1982में शुरू हुई, जब वे एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड में चुने गए। 1991में वे पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और 16सालों तक इस पद पर रहे। उसी साल वे बारामती से लोकसभा सांसद चुने गए, लेकिन सीट चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी। उसके बाद वे बारामती विधानसभा से सात बार विधायक बने: 1991 (उपचुनाव), 1995, 1999, 2004, 2009, 2014और 2019।
अजित पवार ने 1991-92में सुधाकरराव नाईक सरकार में कृषि और ऊर्जा राज्य मंत्री के रूप में काम किया। 1999में वे सिंचाई मंत्री बने और 2003में ग्रामीण विकास का प्रभार भी संभाला। वे 1999से 2014तक जल संसाधन विभाग संभालते रहे, विभिन्न सरकारों में। महाराष्ट्र की राजनीति में वे 'सत्ता के खिलाड़ी' के रूप में जाने जाते थे, जो कभी सत्ता से बाहर नहीं रहे। उन्होंने छह बार उपमुख्यमंत्री का पद संभाला: 2010-14 (पृथ्वीराज चव्हाण के साथ), 2019का संक्षिप्त कार्यकाल (देवेंद्र फडणवीस के साथ), 2019-22 (उद्धव ठाकरे के साथ), 2023-24 (एकनाथ शिंदे के साथ) और 2024-26 (फडणवीस के साथ)। 2022-23में वे विपक्ष के नेता भी रहे।
2023में NCP में फूट
दरअसल, 2023में एनसीपी में फूट के बाद उन्होंने अपनी धड़े की अगुवाई की और चुनाव आयोग ने फरवरी 2024में उनके गुट को असली एनसीपी माना। वे महाराष्ट्र के बजट और वित्त के विशेषज्ञ माने जाते थे। हालांकि, उनके करियर में विवाद भी रहे, जैसे 2012में 70,000करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले के आरोप, लवासा प्रोजेक्ट में अनियमितताएं और 2013में सूखे पर की गई विवादास्पद टिप्पणी, जहां उन्होंने 'बांध में पेशाब' करने की बात कही थी, जिसके लिए उन्होंने माफी मांगी।
अजित पवार का निजी जीवन
अजित पवार का निजी जीवन राजनीति से अलग सहकारी क्षेत्र और कृषि से जुड़ा रहा। 1985 में उन्होंने सुनेत्रा पवार से शादी की, जिनके साथ उनके दो बेटे हैं- पार्थ और जय। पार्थ पवार भी राजनीति में सक्रिय हैं। अजित ग्रामीण महाराष्ट्र से जुड़े रहे और बारामती उनके दिल के करीब था, जहां वे अंतिम सांस तक सक्रिय थे।
Leave a comment