Sapna Chaudhary: हरियाणवी डांसर सपना चौधरी को बड़ी राहत, कोर्ट ने विदेश जाने की दी अनुमति

Sapna Chaudhary: हरियाणवी डांसर सपना चौधरी को बड़ी राहत, कोर्ट ने विदेश जाने की दी अनुमति

Sapna Chaudhary Travel Abroad: हरियाणवी डांसर, सिंगर और एक्ट्रेस सपना चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके पासपोर्ट के रिन्यूअल/री-इश्यू से इनकार करने वाले आदेश को रद्द कर दिया और साफ तौर पर कहा है कि उनका पासपोर्ट दस सालों की अवधि के लिए नवीनीकृत किया जाए। कोर्ट के इस फैसले से सपना का विदेश यात्रा का रास्ता साफ हो गया है, जहां वह अपनी प्रोफेशनल परफॉर्मेंस के लिए जाती हैं। यह फैसला 13जनवरी 2026को प्रभावी माना जा रहा है, क्योंकि सपना को पहले हर विदेश यात्रा के लिए अलग-अलग परमिशन लेनी पड़ती थी, जो उनके करियर को प्रभावित कर रहा था। 

क्या है पूरा मामला?

बता दें, साल 2018में सपना चौधरी के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें सपना और अन्य पर धोखाधड़ी का आरोप था। जिसके बाद सपना पर लखनऊ के आशियाना थाने में केस क्राइम नंबर 621/2018दर्ज किया गया था। उन पर IPC की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप लगे थे। कुछ समय बाद सपना को इस मामले में जमानत मिली, लेकिन ट्रायल अभी चल रहा है। उनका पासपोर्ट एक्सपायर हो गया था और रिन्यूअल के लिए ट्रायल कोर्ट से NOC की जरूरत थी। ट्रायल कोर्ट (एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, कोर्ट नंबर 29, लखनऊ) ने 21दिसंबर 2023को उनकी अर्जी खारिज कर दी, यह कहते हुए कि उसके पास ऐसा करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है। सपना ने इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में सेक्शन 482 CrPC के तहत अर्जी दाखिल की।

हाईकोर्ट का फैसला और वजहें

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शमीम अहमद ने अपने फैसले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट का कहना है कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और 19(1)(g) (व्यवसाय करने का अधिकार) के तहत मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने मानेका गांधी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (1978) केस का हवाला दिया, जहां सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पासपोर्ट रखना नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसे मनमाने ढंग से रोका नहीं जा सकता।

कोर्ट ने पासपोर्ट एक्ट, 1967 की धारा 6(2)(f) का जिक्र किया, जिसके अनुसार अगर कोई क्रिमिनल केस पेंडिंग है, तो पासपोर्ट जारी करने से इनकार किया जा सकता है। लेकिन 25 अगस्त 1993 की नोटिफिकेशन और 10 अक्टूबर 2019 के ऑफिस मेमोरेंडम के मुताबिक, कोर्ट की परमिशन से पासपोर्ट जारी या रिन्यू किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि कोई वैधानिक रोक नहीं है कि ट्रायल कोर्ट NOC नहीं दे सकता। ट्रायल कोर्ट ने बिना नोटिफिकेशन पर विचार किए आदेश पारित किया, जो गलत है।

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