
नई दिल्ली:अभिनेता और फिल्म निर्देशक मनोज कुमार का 87वर्ष की आयु में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया।मनोज कुमार के जीवन की कुछ झलकियां, जिनमें 63वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह भी शामिल है, जहां उन्हें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से 47वां दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनके निधन से भारतीय सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। मनोज कुमार को उनके योगदान के लिए 1992 में पद्मश्री और 2015 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनका जाना हिंदी सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है।
मनोज कुमार के निधन पर पीएम मोदी ने दुख व्यक्त किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि महान अभिनेता और फ़िल्मकार मनोज कुमार जी के निधन से बहुत दुःख हुआ। वे भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे, जिन्हें ख़ास तौर पर उनकी देशभक्ति के जोश के लिए याद किया जाता था, जो उनकी फ़िल्मों में भी झलकता था। मनोज जी के कामों ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को जगाया और वे पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।
कई देश भक्ति फिल्मों में निभाया था किरदार
मनोज कुमार अपनी देशभक्ति फिल्मों जैसे शहीद (1965), उपकार (1967), पूरब और पश्चिम (1970), और रोटी कपड़ा और मकान (1974) के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। उन्हें "भारत कुमार" के नाम से भी पहचाना जाता था, जो उनकी देशप्रेम से भरी फिल्मों और किरदारों का प्रतीक था।
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