भारत में डराने लगा है मंकीपॉक्स, केरल के बाद अब दिल्ली में मिला पहला मरीज

भारत में डराने लगा है मंकीपॉक्स, केरल के बाद अब दिल्ली में मिला पहला मरीज

नई दिल्ली: भारत में मंकीपॉक्स अपने पैर पसारने लगा है। देश में तीन मरीज मिलने के बाद एक ओर मरीज मिल गया है बीते दिनों में केरल में तीन मरीज मिल चुकी है वहीं अब दिल्ली में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया है। दिल्ली में मरीज मिलने से इस वायरस ने सरकार को चिंता में डाल दिया है। हैरानी की बात तो सह है कि इस मरीज की कोई विदेशी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है।

दिल्ली में मिला नया मरीज मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 31 वर्षीय व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि करते हुए बताया है कि इसकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। यानी अब तक मिले चार मरीजों में ये पहला ऐसा मामला है, जिसकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। इस मरीज को तेज बुखार और स्किन में घावों के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके अलावा केरल में मंकीपॉक्स के तीन मरीज मिल चुके हैं। हालांकि इन तीनों ही मरीज यूएई से लौटे थे और वहीं पर ये किसी संक्रमित के संपर्क में आए थे।

क्या है मंकीपॉक्स

मंकीपॉक्स एक चिकनपॉक्स की तरह का वायरस है लेकिन इसमें अलग तरह का वायरल संक्रमण होता है। ये सबसे पहले साल 1958में कैद हुए एक बंदर में पाया गया था। साल 1970में ये पहली बार ये किसी इंसान में पाया गया। ये वायरस मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के वर्षा वन इलाकों में पाया जाता है।

मंकीपॉक्स के लक्षण

•             मंक्सीपॉक्स के होने पर सपाट त्वचा का रंग बदलने लगता है

•             त्वचा पर लाल निशान और गांठें पड़ सकती हैं।

•             सफेद पस से भरे फफोले शरीर पर पड़ सकते हैं जोकि चिकन पॉक्स की तरह दिखाई देते हैं।

•             संक्रमण की रफ्तार कम होने पर फफोले सूखने लगते हैं और 21दिन बाद खत्म हो जाते हैं।

•             मंकीपॉक्स चेहरे से फैलना शुरू होता है। फिर बाहों, हाथों, पैरों और जननांग समेत शरीर के बाकी हिस्सों में फैलता है।

मंकीपॉक्स का इलाज

मंकीपॉक्सके लिए वर्तमान में कोई विशिष्ट उपचार की सिफारिश नहीं की गई है। हालांकि चेचक के खिलाफ टीकाकरण रोग को रोकने में लगभग 85प्रतिशत प्रभावी पाया गया है इसलिए, यह मंकीपॉक्स के गंभीर लक्षणों को रोकने के लिए बचपन में चेचक के टीकाकरण की सिफारिश करता है।

भारत में सरकार द्वारा नई गाइडलाइनस जारी

•             संक्रामक अवधि के दौरान रोगी को 21दिनों की तक लोगों से दूरी बनाए।

•             मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने पर लैब में टेस्टिंग करवाए।

•             मंकीपॉक्स के लिए पीसीआर या डीएनए टेस्टिंग ही मान्य होगी।

•            रोगी अपनी देखभाल, डायग्नोसिस, केस मैनेजमेंट आदि पर ध्यान दें।

•             रोगी को अपने ओर उनके सपंर्क में आए कपड़ों से भी दूरी बनाए रखें।

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