Haryana Metro Project: हरियाणा के पलवल और बल्लभगढ़ के बीच मेट्रो कनेक्टिविटी का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। हरियाणा सरकार ने बल्लभगढ़-पलवल मेट्रो विस्तार परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है। करीब 28 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित रूट पर 10 स्टेशनों की योजना बनाई गई है। अब परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के पास भेजा गया है। इस परियोजना के शुरू होने से दक्षिण हरियाणा के लोगों को दिल्ली-एनसीआर तक आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
बल्लभगढ़-पलवल मेट्रो परियोजना को मिली मंजूरी
हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (HMRTC) की बोर्ड बैठक में इस परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने की।
प्रस्तावित मेट्रो विस्तार दिल्ली मेट्रो की वायलेट लाइन के अंतिम स्टेशन राजा नाहर सिंह (बल्लभगढ़) से पलवल तक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह रूट राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (पुराना NH-2) और दिल्ली-आगरा हाईवे के समानांतर विकसित करने का प्रस्ताव है।
परियोजना पूरी होने के बाद बल्लभगढ़, सीकरी, पृथला और पलवल सहित रास्ते में पड़ने वाले प्रमुख औद्योगिक एवं रिहायशी क्षेत्रों के लोगों को फायदा मिल सकता है।
कितनी लंबी होगी मेट्रो लाइन और कितना आएगा खर्च?
बल्लभगढ़ से पलवल तक मेट्रो विस्तार परियोजना को दक्षिण हरियाणा के परिवहन नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रस्तावित योजना की प्रमुख जानकारियां इस प्रकार हैं:
रूट की लंबाई: लगभग 24 से 28 किलोमीटर
प्रस्तावित स्टेशन: 10 स्टेशन, विस्तृत योजना में संख्या बढ़ने की संभावना
निर्माण का स्वरूप: एलिवेटेड मेट्रो कॉरिडोर
अनुमानित लागत: करीब 4,320 से 4,500 करोड़ रुपये
वर्तमान स्थिति: फिजिबिलिटी रिपोर्ट को राज्य सरकार की मंजूरी, अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र को भेजा गया
परियोजना की अंतिम लागत, स्टेशन की संख्या और निर्माण की समयसीमा संबंधित विभागों की आगे की मंजूरियों और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।
बल्लभगढ़-पलवल मेट्रो स्टेशन लिस्ट
प्रस्तावित योजना के अनुसार, मेट्रो कॉरिडोर पर निम्नलिखित 10 स्टेशन बनाए जाने की योजना है:
सेक्टर 58-59 (झाड़सेंतली): बल्लभगढ़ के बाद प्रस्तावित पहला स्टेशन।
सीकरी: औद्योगिक और रिहायशी क्षेत्र के यात्रियों को लाभ।
सोफ्ता: औद्योगिक एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कनेक्टिविटी।
पृथला: मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल और अपैरल उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र।
बघौला: लॉजिस्टिक्स और परिवहन गतिविधियों वाले इलाके को फायदा।
आल्हापुर: स्थानीय यात्रियों के लिए प्रस्तावित स्टेशन।
दिल्ली गेट: पलवल शहर के प्रमुख हिस्सों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद।
पलवल बस स्टैंड: बस और मेट्रो के बीच यात्रा की सुविधा विकसित करने की संभावना।
आगरा चौक: शहर के प्रमुख आवागमन क्षेत्र को कनेक्टिविटी।
पलवल मिनी सेक्रेटेरिएट: जिला प्रशासनिक केंद्र तक पहुंच आसान बनाने का प्रस्ताव।
ध्यान दें: यह प्रस्तावित स्टेशनों की सूची है। अंतिम स्टेशन लोकेशन और संख्या में आधिकारिक परियोजना दस्तावेजों के अनुसार बदलाव हो सकता है।
KMP और KGP एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा मेट्रो नेटवर्क
बल्लभगढ़-पलवल मेट्रो परियोजना के तहत कनेक्टिविटी को केवल पलवल शहर तक सीमित रखने के बजाय आसपास के प्रमुख एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना भी है।
प्रस्ताव के अनुसार, मेट्रो के अंतिम छोर को कुसलीपुर या अटोहां चौक के आसपास से कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे और कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (KGP) यानी ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है।
इससे सोहना, गुरुग्राम, मानेसर, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद की ओर जाने वाले यात्रियों को बेहतर परिवहन विकल्प मिल सकता है। हालांकि, इस कनेक्टिविटी का अंतिम स्वरूप विस्तृत योजना और स्वीकृत अलाइनमेंट पर निर्भर करेगा।
हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर से भी मिलेगी कनेक्टिविटी
प्रस्तावित मेट्रो विस्तार को पलवल में विकसित हो रहे हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर से जोड़ने की योजना भी महत्वपूर्ण है। इससे भविष्य में पलवल से मानेसर, सोनीपत और पातली जैसे क्षेत्रों तक रेल नेटवर्क के जरिए पहुंच आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
मेट्रो और क्षेत्रीय रेल नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल बनने से औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों, कारोबारियों और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को फायदा होने की उम्मीद है।
गुरुग्राम-नोएडा नमो भारत कॉरिडोर पर भी बड़ा अपडेट
हरियाणा सरकार की ओर से गुरुग्राम-नोएडा नमो भारत कॉरिडोर को लेकर भी योजना पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दिल्ली से होकर गुजरने की आवश्यकता कम करते हुए दक्षिण हरियाणा के शहरों को जेवर एयरपोर्ट और ग्रेटर नोएडा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जोड़ना है।
यदि इन परिवहन परियोजनाओं को मंजूरी और निर्धारित चरणों में क्रियान्वयन मिलता है, तो हरियाणा-एनसीआर में आवागमन, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिल सकती है।