Delhi News: दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन और धरने के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन यहां प्रदर्शन करने के लिए नियमों का पालन करना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति, संगठन या समूह बिना अनुमति के प्रदर्शन करता है, तो उसे पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। मामले की गंभीरता के आधार पर हिरासत, एफआईआर, जुर्माना और जेल तक की सजा हो सकती है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, जंतर-मंतर या दिल्ली के किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति धरना, नारेबाजी या भीड़ इकट्ठा करना परेशानी का कारण बन सकता है। पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए नई दिल्ली जिले के डिप्टी पुलिस कमिश्नर से लिखित अनुमति लेना जरूरी होता था। इसमें प्रदर्शनकारियों की संख्या और प्रदर्शन का समय तय किया जाता था।
धारा 163 के उल्लंघन पर क्या होगी कार्रवाई?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रशासन किसी क्षेत्र में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा सकता है। यह आदेश कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जारी किया जाता है। अगर किसी इलाके में पांच या उससे अधिक लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध है, तो वहां बिना अनुमति भीड़ जुटाना कार्रवाई की वजह बन सकता है। पुलिस लोगों को वहां से हटने का आदेश दे सकती है। आदेश नहीं मानने पर उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है या जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग करके हटाया जा सकता है। हालांकि, कार्रवाई उस समय लागू आदेश और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
सरकारी आदेश नहीं माना तो जेल भी संभव
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत सरकारी अधिकारी के कानूनी आदेश की अवहेलना करने पर मामला दर्ज हो सकता है। अपराध की प्रकृति के अनुसार इसमें जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है। वहीं, गैरकानूनी सभा से जुड़े मामलों में BNS की धारा 189 लागू हो सकती है। अगर प्रदर्शनकारी हथियार लेकर जमा होते हैं या हिंसा करते हैं, तो उनके खिलाफ अधिक गंभीर धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।
पुलिस से भिड़ना और तोड़फोड़ पड़ सकती है भारी
अगर प्रदर्शन के दौरान लोग पुलिस का काम रोकते हैं, बैरिकेड तोड़ते हैं या सरकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट करते हैं, तो अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है। पुलिस पर हमला करने या बल प्रयोग करने की स्थिति में अपराध की गंभीरता के अनुसार सजा बढ़ सकती है। इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान बसों, बैरिकेड्स या अन्य सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act) के तहत मामला दर्ज हो सकता है। दोषी पाए जाने पर जेल की सजा और नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी भी तय हो सकती है।
पुलिस प्रदर्शनकारियों को कहां ले जाती है?
बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर पुलिस लोगों को हिरासत में लेकर किसी दूसरे स्थान, जैसे पुलिस लाइन या निर्धारित केंद्र पर ले जा सकती है। मामूली मामलों में उन्हें बाद में छोड़ा जा सकता है, जबकि गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि हर प्रदर्शन में गिरफ्तारी या जेल होना तय नहीं है। कार्रवाई लागू निषेधाज्ञा, पुलिस के आदेश, प्रदर्शन के तरीके और कथित अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है। इसलिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से पहले संबंधित पुलिस प्रशासन से अनुमति और लागू नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।
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