मनोहर सरकार ने आसमान तक लहराया परचम

मनोहर सरकार ने आसमान तक लहराया परचम

हरियाणा की चुनावी जंग हर रोज दिलचस्प होती जा रही है। विपक्षी दलों की नीति डाल डाल चल रही है, तो मनोहर सरकार पात-पात है।

कहीं रूठों को मनाने की कवायद चल रही है, तो कहीं अपने सियासी कद को कायम रखने के लिए माछापच्ची हो रही है। और इसी बीच मनोहर सरकार ने जमीन से लेकर आसमान तक अपना परचम लहरा दिया है।

जन आशीर्वाद के लिए यात्रा पर निकले प्रदेश के मुख्या मनोहर लाल ने प्रदेशवासियों को एक और बड़ी सौगात दे दी है। मुख्यमंत्री ने हिसार एयरपोर्ट से हवाई सेवा की न सिर्फ शुरूआत की, बल्कि 7 सिटर विमान से चंडीगढ़ तक के लिए उड़ान भी भरी, और ये साफ कर दिया कि सरकार प्रदेश के विकास के लिए लगातार प्रसयासरत है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल अपनी सियासी जमीन को तलाशते हुए, खुद को साबित करने की जुगत में लगे हैं। चौटाला परिवार को मिलाने के लिए सर्वखाप पंचायत ने जो कवायद शुरू की थी, उसे इनेलो नेताओं का तो समर्थन और हामी मिल गई है, अभय चौटाला से लेकर ओमप्रकाश चौटाला तक खाप के फैसले को मानने के लिए रज़ामंदी दे चुके हैं।

लेकिन अभी जेजेपी का रुख साफ नहीं हो पाया है। हालांकि दुष्यंत चौटाला ने इतना जरूर कहा है कि वो अपने पिता से इस संबंध में बात करेंगे, और उनका जो फैसला होगा वो उन्हें मंजूर होगा। वहीं दूसरी तरफ हरियाणा कांग्रेस में खुद को अलग थलग सा महसूस कर रहे भूपेंद्र हुड्डा भी अपने लिए राजनीतिक संभावनाएं तलाश रहे हैं। 18 अगस्त को महापरिवर्तन रैली में कांग्रेस हाईकमान को अपने बागी तेवर दिखाने वाले हुड्डा  दिया है। हुड्डा ने इस रैली के जरिए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने और पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए शर्तें रखी थीं। हलांकि इस दबाव की राजनीति के बावजूद हुड्डा के हाथ कुछ नहीं लगा था। लिहाजा भूपेंद्र हुड्डा अब अपनी सियासी जमीन तलाश रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने दिल्ली के विट्ठल भाई पटेल हाउस के स्पीकर हॉल में अपने समर्थक नेताओं के साथ बैठक की

सूबे की सियासत इस वक्त बीजेपी के रंग में रंगी दिखाई दे रही है। तो वहीं विपक्षी दलों की हालत   उस ऊंट की तरह हो गई है, जो किस करवट बैठेगा, ये कोई नहीं कह सकता। चुनावी समीकरण साधने के लिए विपक्ष पुरजोर कोशिश कर रहा है। लेकिन वक्त रेत की तरह उसके हाथों से फिसलता जा रहा है। ऐसे में विपक्ष अगर अब भी इसी तरहबिखराव और अंतर्कलह से जूझता रहा, तो सत्ता में उसकी  भागीदारी कितनी होगी ये कहना मुश्किल होगा।

   

 

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