Makar Sankranti 2025: कई राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता हैं मकर संक्रांति, वहज है बहुत खास

Makar Sankranti 2025: कई राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता हैं मकर संक्रांति, वहज है बहुत खास

Makar Sakrant 2025 Celebration: मकर संक्रांति भारत के कई हिस्सों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है, और इसके पीछे के कारणों को समझने के लिए हमें इसके इतिहास और सांस्कृतिक महत्व को समझना पड़ेगा। भारत के कई राज्यों में इस त्योहार को लोग बहुत प्रमुखता से मनाते हैं, लेकिन हर राज्य में इसे मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों से जाता है। कई राज्यों में इसे एक ही दिन और एक ही समय मनाया जाता है, लेकिन वहां की संस्कृति के हिसाब से एक मनाने का तरीका अलग है।

मकर संक्रांति मनाने का अलग-अलग तरीका

मकर संक्रांति एक प्राचीन भारतीय  त्योहार है जो भारत में सदियों से मनाया जा रहा है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के मौके पर मनाया जाता है, जो आमतौर पर जनवरी के मध्य में होता है।

मकर संक्रांति के पीछे के कारण में से एक यह है कि यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के मौके पर मनाया जाता है, जो कि एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और यह कई राज्यों में अलग-अलग तरीके से मनाने का रीवाज है।

अगर भारत के चार प्रमुख राज्यों की बात करें तो मकर संक्रांति यहां अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। इनमें उत्तर प्रदेश जो कि भारत का सबसे बड़ा राज्य है। चाहे वो भूगोलिक क्षेत्रफल की बात हो या फिर आबादी की बात। दूसरा बिहार राज्य है, तीसरा राज्य पश्चिम बंगाल है तो चौथा तमिलनाडू है।

उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को "खिचड़ी" के नाम से जाना जाता है।

बिहार में मकर संक्रांति को "तिल संक्रांति" के नाम से भी जाना जाता है।

पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति को "पौष संक्रांति" भी कहा जाता है।

तमिलनाडु में मकर संक्रांति को "पोंगल" के रूप में मनाया जाता है।  

इन विभिन्न रूपों में से प्रत्येक राज्यों के अपने विशिष्ट रीति-रिवाज और परंपराएं हैं, लेकिन सभी में एक बात समान है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के अवसर पर मनाया जाता है और यह भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 

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