
HEALTH: आज के आधुनिक में धुम्रपान करना एक शौक बनता जा रहा है। हालांकि सभी को पता है कि धुम्रपान सेहत के लिए हानिकारक होता और इससे केंसर का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिगरेट हो या बीड़ी श्वसन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करने के साथ एक बीमारी से ग्रस्त भी कर देता है। बता दें कि इसके सेवन से बुल्ला रोग भी हो जाता है।
क्या है बुल्ला रोग
बुल्ला रोग एक त्वचा संबंधी बीमारी है जो वायरस से होती है। इस बीमारी को चिकित्सा में हेर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस टाइप 1 (HSV-1) के कारण होने वाली इन्फेक्शन के रूप में भी जाना जाता है। इस वायरस से इन्फेक्शन त्वचा के ऊपरी भाग में होता है और इससे जलन, खुजली, दर्द और बुल्ले निकलने जैसे लक्षण होते हैं। यह बीमारी आमतौर पर मुंह, नाक और आंतरिक अंगों के आसपास त्वचा के संपर्क से फैलती है।
बुल्ला रोग के लक्षण
यदि आपको लगता है कि आप बुल्ला रोग के लक्षणों से पीड़ित हो सकते हैं, तो अपने चिकित्सक से संपर्क करें और उनसे सलाह लें।
बचाव
बुल्ला रोग का इलाज विभिन्न दवाओं और घरेलू उपचारों के माध्यम से किया जा सकता है। दवाओं में एंटीवायरल दवाएं, जो वायरस के विकास को रोकती हैं, शामिल होती हैं। घरेलू उपचार में आलू बुखारे, नीम की पत्तियाँ, शहद और नारियल तेल शामिल होते हैं। इस बीमारी से बचाव के लिए, बुल्ले निकलने वाली त्वचा से संपर्क से बचें और वायरस से बचने के लिए नियमित रूप से हाथ धोते रहें।
फेफड़ों पर बुल्ला रोग का असर
फेफड़ों पर बुल्ला रोग का असर अधिकतर गंभीर होता है और यह जीवनसंबंधी खतरा भी पैदा कर सकता है। जब बुल्ला रोग फेफड़ों पर असर डालता है, तो यह प्यूमोनिया, अस्थमा और अन्य फेफड़ों संबंधी बीमारियों के विकास का कारण बन सकता है।
बुल्ले फेफड़ों में दबाव डालते हैं जिससे फेफड़ों के आकार में बदलाव आते हैं और उनकी क्षमता कम हो जाती है। यह फेफड़ों के नलिकाओं में संकोच उत्पन्न कर सकता है, जिससे फेफड़ों की स्वच्छता कम हो जाती है और इससे फेफड़ों के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा, बुल्ला रोग फेफड़ों के अंदर रसायनों और अन्य पदार्थों के उत्पादन को बढ़ा सकता है जो फेफड़ों के अंदर जमा होते हैं और फेफड़ों के संक्रमण का कारण बनते हैं।फेफड़ों पर बुल्ला रोग का असर अधिकतर शरीर के अन्य हिस्सों पर असर से भिन्न होता है, इसलिए इसका समय पर इलाज करना बहुत आवश्यक होता है।
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