चीन में भगवान की तरह पूजा जाता है ये भारतीय, Xi Jinping भी झुकाते हैं अपना सर

चीन में भगवान की तरह पूजा जाता है ये भारतीय, Xi Jinping भी झुकाते हैं अपना सर

Dr Dwarkanath Kotnis China story: भारत-चीन संबंधों में चल रहे तनाव के बावजूद बीजिंग में आज भी एक भारतीय को भगवान की तरह पूजा जाता है। चीन में उनके नाम पर कई स्कूल, कॉलेज और संग्रहालय हैं। चौराहों पर उनकी मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं। आजादी के बाद से अब तक जितने भी चीनी राष्ट्रपति भारत आए हैं, उस व्यक्ति के परिवार से मिले बिना नहीं लौटे हैं। उस शख्स का नाम है डॉ. द्वारकानाथ कोटनिस।

'कोटनिस का वो अहसान,जिसका सम्मान करना शी जिनपिंग भी नहीं भूलते'

अरुणाचल में भारत पर फुंफकारने वाला 'ड्रैगन'  इस डॉक्टर के आगे सहिष्णु क्यों बन जाता है?  ये कहानी बेहद दिलचस्प है। ये बात आज की पीढ़ी को भी जाननी चाहिए। दरअसल ये घटना दूसरे विश्व युद्ध के दौर की यानी करीब 80-85 साल पुरानी है। और इस कहानी के हीरो हैं डॉक्टर कोटनिस। जिनका जन्म 1910 में सोलापुर में हुआ था। वह एक विद्वान और प्रसिद्ध चिकित्सक थे। यहां तक ​​कि लंबे समय तक चीन की सत्ता पर काबिज शी जिनपिंग भी डॉ. कोटनिस का सम्मान करना नहीं भूलते।

डॉ. कोटनिस 1938 में जापानी हमले के दौरान चीनी सैनिकों की मदद के लिए चीन गई टीम का हिस्सा थे। उस दौर के कुछ बुजुर्गों के मुताबिक, वह मेडिकल टीम तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू के अनुरोध पर चीन गई थी। विदेश में उनकी मुलाकात एक चीनी नर्स से हुई,जिससे उन्होंने शादी की। हालाँकि, अत्यंत कठिन परिश्रम करते हुए और कठिन परिस्थितियों में चीनी लोगों की जान बचाते हुए, वह स्वयं बिस्तर पर गिर गए और 9 दिसंबर 1942 को उनकी मृत्यु हो गई। चीन आज भी उनके उस उपकार को स्वीकार करता है।

कोटनिस की वो कहानी जो आज भी की जाती है याद

भारतीय डॉक्टरों की टीम अगले साढ़े तीन साल, चीन के अलग-अलग प्रांतों मेंचीनी सैनिकों का इलाज करती रही। डॉ. कोटनिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी औरदिन-रात सेवा में जुटे रहे। साल 1940 में तो उन्होंने करीब 72 घंटे लगातारऑपरेशन किया। कई रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि डॉक्टर कोटनिस ने अकेले 800 से ज्यादा चीनी सैनिकों का इलाज कर उनकी जान बचाई थी।

बन चुकी है फिल्म

दूसरों की मदद करने की सदियों पुरानी भारतीय परंपरा है। डॉ. कोटनिस की कहानी उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है। आपको बता दें कि इस डॉक्टर की प्रेम कहानी पर एक फिल्म भी बन चुकी है। महान फिल्म निर्माता वी शांताराम ने ख्वाजा अहमद अब्बास की पटकथा पर आधारित डॉ. कोटनिस की अमर कहानी (1946) में उनकी कहानी को 70 मिमी स्क्रीन पर चित्रित किया।

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