
Kishtwar Cloudburst: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चशोटी गांव में बादल फटने से वहां के लोगों को एक खौफनाक मंजर देखने को मिला। गुरुवार दोपहर आई इस आपदा में अब तक 52 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें दो CISF जवान भी शामिल हैं। वहीं 200 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और 120 लोग घायल हैं जिनका इलाज चल रहा है।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
बताया जा रहा है कि रेस्क्यू ऑपरेशन को शुक्रवार सुबह फिर से शुरू किया गया। बारिश के दौरान भी पुलिस, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय लोग मलबे में दबे जीवित लोगों को खोजने में जुटे हुए हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य को तेज करने के लिए कई अर्थ-मूवर्स तैनात किए हैं, जिनसे विशाल बोल्डर, उखड़े पेड़ और बिजली के खंभे हटाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक कई लोगों को घायल अवस्था में बचाया गया है।
कई जगह पर मची तबाही
आपदा में 16 रिहायशी मकान, सरकारी इमारतें, तीन मंदिर, चार पानी की चक्कियां और एक 30 मीटर लंबा पुल बह गया। वहीं, दर्जनभर से ज्यादा वाहन भी इस बाढ़ की चपेट में आकर तबाह हो गए। बाढ़ से एक अस्थायी बाजार, लंगर स्थल और एक सुरक्षा चौकी भी पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। चोशिटी गांव किश्तवाड़ से करीब 90 किलोमीटर दूर है और मचैल माता मंदिर यात्रा का अंतिम सड़क मार्ग वाला पड़ाव है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां से 8.5 किलोमीटर पैदल यात्रा कर 9,500 फीट ऊंचाई पर स्थित मंदिर पहुंचते हैं। इस बार यात्रा 25 जुलाई से शुरू हुई थी और 5 सितंबर तक चलनी थी, लेकिन अब हादसे के चलते इसे दूसरे दिन से ही रोक दिया गया है।
पीड़ित ने बयां की दास्तान
वहीं, किश्तवाड़ में बादल फटने से पीड़ित लोगों का दुख अस्पताल में साफ नजर आया। मचैल माता मंदिर की यात्रा के लिए गए चशोटी गांव में हुई इस भयानक घटना से घायल हुए लोग और उनके परिवार सदमे में हैं। अपने प्रियजनों को खो चुके लोगों के आंसू रुक नहीं रहे हैं। घटना में घायल एक पीड़ित ने बताया कि हमें लगा कि दुनिया खत्म हो गई। चारों तरफ बस पानी और पत्थर नजर आ रहे थे। हम किसी तरह बचकर यहां पहुंचे हैं। वहीं, एक अन्य घायल महिला, जो चोटिल होने की वजह से बोल नहीं पा रही थी, लेकिन उसकी आंखों में उसका दर्द साफ नजर आ रहा था।
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