
हिंदू धर्म में वैसे तो कई तरह के त्योहार मनाए जाते है। जहां एक तरफ सनातन धर्म में पूरे साल तीन प्रकार के तीज का व्रत मनाया जाता है। वहीं दूसरी तरफ तीन तरह के तीज का त्योहार होता है, जिसमें हरतालिका तीज, हरियाली तीज और कजरी तीज शामिल है। वैदिक पंचांग के मुताबिक, सावन के बाद भाद्रपद के महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का व्रत रखा जाता है। सुहागिन महिलाएं इस व्रत को अखंड सौभाग्य और अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए रखती है। ज्यादातर कजरी तीज का व्रत राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्री राज्यों में मनाया जाता है।
बता दें कि वैदिक पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीय तिथि 21 अगस्त शाम 5:10 पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन 22 अगस्त दोपहर 1:50 पर होगा। उदया तिथि के मुताबिक, कजरी तीज पर्व 22 अगस्त 2024, गुरूवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 5:30 से सुबह 7: 30 के बीच रहेगा। वहीं दोपहर के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 12:20 से दोपहर 3: 35 के बीच रहेगा।
क्या है कजरी तीज का महत्व?
गौरतलब है कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, सबसे पहले कजरी तीज का पालन माता पार्वती ने किया था। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन सुहागिन महिलाएं परिवार में सुख-समृद्धि और अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत का पालन करती है। मान्यता है कि इस व्रत का पालन करने से उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और जीवन में आ रही सभी प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती है। करवा चौथ की भांति ही इस दिन चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
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