Justice Verma:जस्टिस वर्मा को पेंशन से धोना पड़ सकता है हाथ! इस्तीफ देना एकमात्र विकल्प

Justice Verma:जस्टिस वर्मा को पेंशन से धोना पड़ सकता है हाथ! इस्तीफ देना एकमात्र विकल्प

Justice Yashwant Verma Case: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया है। ऐसे में संसद की ओर से हटाए जाने से पहले उनके पास आखिरी विकल्प इस्तीफा देना ही बचा है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट चीफ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील बी. वी. आचार्य को शामिल किया गया है।

ओम बिरला ने 12 अगस्त को लोकसभा में कहा कि यह समिति जल्द अपनी रिपोर्ट तैयार कर पेश करेगी। तब तक वर्मा को हटाने का प्रस्ताव लंबित रहेगा। लोकसभा स्पीकर ने बताया कि 21 जुलाई को 146 लोकसभा सदस्यों ने जज वर्मा को हटाने की मांग की थी, जिसमें भाजपा के रवि शंकर प्रसाद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रस्ताव दिए थे।

ऐसे में नहीं मिलेगी पेंशन

जजों की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया को जानने वाले विशेषज्ञों ने बताया कि वर्मा अगर संसद के सामने अपना पक्ष रखने जाते हैं, तो वह मौखिक रूप से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसमें उनका इस्तीफा माना जाएगा। अगर वह इस्तीफा देते हैं, तो उन्हें सेवानिवृत्त जज के रूप में पेंशन और अन्य लाभ मिलेंगे। लेकिन अगर उन्हें संसद की ओर से हटाया गया, तो उन्हें पेंशन या अन्य सेवाएं नहीं मिलेंगी।

क्या कहता है अनुच्छेद 217

संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार, हाईकोर्ट के जज अपने हस्ताक्षर के साथ अपना इस्तीफा दे सकते हैं। जज के इस्तीफे को किसी स्वीकृति की जरूरत नहीं होती है। केवल एक पत्र ही काफी होता है। जज इस्तीफे के लिए एक संभावित तारीख भी दे सकते हैं और इस तारीफ से पहले वे इस्तीफा वापस लेने के लिए बाध्य हैं।

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