
असम: देश के असम राज्य में जापानी बुखार लोगों में तेजी के साथ बढ़ रहा है। राज्य में जापानी बुखार के नए आठ मामले सामने आ चुके है। साथ ही इस बुखार से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। इसी के साथ इस महीने मरने वालों की संख्या बढ़कर 48 हो गई है और कुल मामले 302 हो गए हैं। सरकारी आंकडे के अनुसार, जापानी बुखार से मौत का मामला चिरांग जिले से सामने आया है। वहीं बारपेटा में तीन और बक्सा, बोंगाईगांव, चराईदेव, मोरीगांव और उदलगुरी में एक-एक ताजा जापानी बुखार के मामले सामने आए।
कैसे फैलता है
जब क्यूलेक्स प्रजाति का कोई मच्छर रोग से ग्रसित सूअर या जंगली पक्षियों का रक्त चूसता है तो उस रोग के वायरस मच्छर में पहुंच जाते हैं। जब यह मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो वह व्यक्ति भी इस रोग की चपेट में आ जाता है।संक्रमण के शिकार व्यक्ति में इस रोग के लक्षण 5 से 15 दिनों के बीच देखने को मिलते हैं।जिसे ‘इंक्युबेशन पीरियड’ कहते हैं।
क्या है जापानी बुखार
जापानी इंसेफेलाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से फैलता है। ये मच्छर फ्लेविवायरस संक्रमित होते हैं। यह संक्रामक बुखार नहीं है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। विशेषज्ञों की मानें तो जापान इंसेफेलाइटिस पूर्वांचल भारत में अधिक होता है। इस बुखार का पता मच्छर के काटने के 5 से 15 दिनों में दिखाई देता है। जापानी इन्सेफेलाइटिस फलैवी वायरस के कारण होता हैं, जो कि मस्तिष्क के आसपास की झिल्ली को प्रभावित करता है।
लक्षण
उपचार
जापानी बुख़ार से पीड़ित मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया जाता है। जबकि मरीज को ऑक्सीज़न मास्क भी दिया जाता है, क्योंकि कई बार मरीज को सांस लेने में भी तकलीफ होती है। जापानी बुखार का वैक्सीन उपलब्ध है। मरीज की हालत गंभीर होने पर टीका दिया जाता है। इस बुखार से बचने के लिए बरसात के दिनों में पूरे शरीर को ढककर रखें। जबकि रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
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