
Waqf Act Amendment: लोकसभा में लंबी चर्चा और विपक्ष के विरोध के बाद वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो गया। अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां सरकार को इसे पास कराने में मुश्किलें आ सकती हैं। बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत नहीं है, लेकिन कुछ रणनीतियों के जरिए इसे पारित कराने की योजना बनाई जा रही है।
राज्यसभा में सरकार की रणनीति
राज्यसभा में कुल 236सदस्य हैं और बहुमत के लिए 119सांसदों का समर्थन जरूरी है। बीजेपी के पास 98सांसद हैं, जबकि एनडीए सहयोगियों को मिलाकर यह संख्या 115तक पहुंचती है। यानी बहुमत से 4वोट कम।
हालांकि, राज्यसभा में 6मनोनीत सांसद भी हैं, जो आमतौर पर सरकार के पक्ष में मतदान करते हैं। अगर ये सभी सरकार को समर्थन देते हैं, तो संख्या 121तक पहुंच सकती है और विधेयक आसानी से पास हो सकता है।
विपक्ष का रुख और संभावित चुनौतियां
इस विधेयक को लेकर विपक्ष पहले ही कड़ा विरोध जता चुका है। कांग्रेस, टीएमसी, आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ कदम बता रहे हैं।
विपक्ष का तर्क है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के अधिकारों को कमजोर करने के लिए लाया गया है। उनका कहना है कि इससे अल्पसंख्यक समुदाय को नुकसान होगा और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
सरकार की दलील- पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन का दावा
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के हित में है। उनका तर्क है कि यदि यह कानून नहीं बना, तो कई सरकारी इमारतें वक्फ बोर्ड के अधीन हो सकती थीं।
सरकार का दावा है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। सरकार इसे कानूनी और प्रशासनिक सुधार के रूप में पेश कर रही है, ताकि विपक्ष के विरोध को कमजोर किया जा सके।
क्या बीजेपी राज्यसभा में बहुमत जुटा पाएगी?
बीजेपी को उम्मीद है कि कुछ निर्दलीय और क्षेत्रीय दलों के सांसद इस विधेयक का समर्थन कर सकते हैं। अक्सर छोटे दल सरकार के साथ मतदान कर लेते हैं, जिससे बहुमत हासिल करना आसान हो सकता है।
अब सबकी नजरें राज्यसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां इस विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बड़ी बहस देखने को मिल सकती है।
Leave a comment